चंडीगढ़ की रातें शिमला से भी सर्द हैं। खुले आसमान के नीचे सोना सोचकर सिहरन उठ जाती है। चंडीगढ़ प्रशासन केसोशल वेलफेयर विभाग ने शहर में 12 रैन बसेरे बनाए हैं, लेकिन आलम यह है कि सभी के सभी फुल हो गए हैं। पीजीआई केबाहर सबसे ज्यादा तीन रैन बसेरे बनाए गए, जिसमेें एक सिर्फ महिलाओं केलिए है। इसके बावजूद लोगों को खुले आसमान तले फुटपाथ पर सोना पड़ रहा है।
कड़ाके की ठंड में बेबस जिंदगी खुले आसमान के नीचे रात गुजारने के लिए मजबूर है। इसके अलावा चंडीगढ़ रेलवे स्टेशन, जीएमसीएच-32, आईएसबीटी-17 और 43 बस स्टैंड पर भी रैन बसेरे बनाए गए हैं। एक शेल्टर में 25 लोगों केसोने की व्यवस्था है। फिर भी किसी तरह 35 से 40 लोगों को एडस्ट किया जा रहा है। बावजूद इसकेबड़ी तादाद में लोग अभी भी खुले में रह रहे हैं।
अमर उजाला रियलिटी चेक में मिला कि पीजीआई केबाहर भारी संख्या में लोग खुले में फुटपाथ पर सो रहे हैं। हालांकि तीन रैन बसेरे जो बने हैं, उनमें रजाई, कंबल व लाइट सहित सभी व्यवस्थाएं हैं, लेकिन जगह नहीं है।
शहर में 10 जगह पर बने हैं रैन बसेरे
समाज कल्याण विभाग ने शहर में 10 जगहों पर 12 रैन बसेरे बनाए हैं ताकि लोगों को ठंड में सड़कों पर रात न गुजारनी पड़ी। रैन बसेरे में लोग पूरी सर्दी इसमें पनाह लेंगे। पहले पीजीआई के बाहर दो रैन बसेरे लगाए थे, लेकिन लोगों की तादाद को देखते हुए तीन कर दिए गए। इसके अलावा जीएमसीएच-32 के बाहर भी मरीजों और तीमारदारों के लिए रैन बसेरा बनाया गया है। इसके अलावा सेक्टर-26 ग्रेन मार्केट, सेक्टर-19, सेक्टर-9 और कई अन्य दूसरी जगह भी रैन बसेरे बनाए गए हैं।
Chandigarh Rain Basera
पुलिस और समाज कल्याण विभाग की टीम करती है चेकिंग
समाज कल्याण विभाग केसाथ पुलिस को भी निर्देश दिए गए हैं कि रात को सड़क किनारे चेकिंग करें। अगर कोई खुले में सो रहा है तो उसे रैन बसेरे में पहुंचाया जाए। बुधवार रात को देखा गया कि सेक्टर-32 चौक केफुटपाथ पर काफी लोग सो रहे थे। जब पुलिस और समाज कल्याण विभाग की टीम ने उन्हें वहां से हटाना चाहा तो वे झगड़े पर उतारू हो गए। मौकेपर पुलिस कर्मचारियों ने बताया कि इन लोगों को कई बार यहां से हटाने आते हैं, लेकिन कोई असर नहीं होता। उल्टा यह लोग सड़क पर हुड़दंग मचाने लगते हैं।
शौचालय की नहीं है व्यवस्था
विभाग की तरफ से रैन बसेरे तो बनाए गए हैं, लेकिन अस्थायी शौचालय की कोई व्यवस्था नहीं की गई। ऐसे में खुले में शौच मुक्त शहर की योजना पर धब्बा लगता है। कई बार तो इस समस्या के चलते झगड़ा भी हो जाता है। पीजीआई केबाहर सो रहे लोगनजदीक ही शौच कर रहे थे तो ऐसे में बहस का भी माहौल हो गया। विभाग को चाहिए कि रैन बसेरे केसाथ एक अस्थायी शौचालय भी बनाए।
अक्सर आ जाते हैं शराबी, बिस्तर करते हैं खराब
रैन बसेरे में ठहरने केलिए अक्सर शराबी भी आ जाते हैं। चूंकि ठंड ज्यादा है तो रैन बसेरे केकर्मचारी उन्हें ठहरा देते हैं। एक कर्मचारी ने बताया कि दो-तीन बार ऐसा हो चुका है कि बिस्तर तक खराब हो गए। अगर सुलाने से इनकार करें तो ठंड में जान का भी खतरा बना रहता है। ऐसी दिक्कतें आती हैं, जिनका कोई हल नहीं है।
जहां पर रैन बसेरों की संख्या कम है, वहां पर अगर बढ़ाने की जरूरत महसूस की गई तो नया शेल्टर बना दिया जाएगा। पीजीआई केबाहर तो हर समय ही मरीज और उनकेतीमारदारों की भीड़ रहती है।
-बीएल शर्मा, सचिव, समाज कल्याण विभाग