रेलवे अब तक दो बार शताब्दी के किराये में इजाफा कर चुका है, लेकिन यात्रियों से लिये जाने वाले सर्विस टैक्स में कमी भी की गई है। इससे शताब्दी का किराया दस रुपये कम हो गया है,
लेकिन जिन यात्रियों ने 17 अक्तूबर से पहले टिकट बुक कराये हैं, उन्हें इसका फायदा नहीं मिलेगा। उन्हें कम हुए किराये के पैसे रिफंड नहीं किए जाएंगे।
ईवनिंग शताब्दी के यात्रियों को ज्यादा फायदा
सर्विस टैक्स की तुलना में कैटरिंग चार्ज का अंतर कम होने से ईवनिंग शताब्दी के यात्रियों को किराया कम होने से ज्यादा फायदा हुआ है। 17 अक्तूबर से पहले ईवनिंग शताब्दी में
एक्जीक्यूटिव क्लास का किराया 1165 रुपये था। इसमें 50 रुपये सर्विस टैक्स और 186 रुपये केटरिंग चार्ज शामिल था। नया फैसला आने के बाद 17 अक्तूबर से केटरिंग चार्ज बढ़कर
190 रुपये हो गया, लेकिन, सर्विस टैक्स कम होकर 34 रुपये हो गया। ऐसा होने से ईवनिंग शताब्दी का किराया कम होकर 1155 रुपये हो गया है, लेकिन पहले से टिकट बुक करा चुके
यात्रियों को इससे फायदा नहीं होगा, बल्कि 10 रुपये प्रति टिकट का नुकसान होगा। दूसरी ओर, ईवनिंग शताब्दी में चेयरकार का सर्विस टैक्स कम करके 16 रुपये कर दिए गया और केटरिंग चार्ज बढ़ाकर 170 रुपये कर दिया गया है। इससे टिकट 35 रुपये ही महंगी हो गई है।
अन्य शताब्दियों पर असर
मार्निंग शताब्दी में चेयरकार का सर्विस टैक्स कम होकर 16 रुपये हो गया है। केटरिंग चार्ज 55 रुपये से बढ़कर 85 रुपये हो गया है। इससे टिकट 25 रुपये महंगी हो गई है। एक्जीक्यूटिव
क्लास में सर्विस टैक्स कम होकर 34 रुपये हो गया है, जबकि केटरिंग चार्ज बढ़कर 105 रुपये हो गया है। इससे किराया 15 रुपये बढ़ गया है। दोपहर की शताब्दी में चेयरकार का सर्विस
टैक्स कम होकर 16 रुपये हो गया है। केटरिंग चार्ज बढ़कर 125 रुपये हो गया है। ऐसे में किराया 35 रुपये महंगा हो गया है।
रेलवे का नियम : वसूली कर मगर रिफंड नहीं
वसूली करो, वापसी नहीं। कु्छ ऐसा ही नियम है रेलवे का, क्योंकि जिन यात्रियों ने 17 अक्तूबर से पहले टिकट बुक कराई है, उनसे रेलवे पांच रुपये बढ़ा किराया भी बिना रसीद दिए वसूल
रहा है, लेकिन जिन टिकट पर पैसे कम हुए हैं, उसे रिफंड नहीं कर रहा है। इस संबंध में अफसर भी नियमों का हवाला देते नजर आ रहे हैं।