रेलवे के बजट से लोगों को काफी उम्मीदें हैं। खासकर मोदी सरकार का यह पहला बजट है। मोदी सरकार अच्छे दिनों का वादा करके सत्ता में आई थी। देखना है कि वह अपने अच्छे दिनों का वादा पूरा कर पाती है या नहीं। इसी संबंध में अमर उजाला ने कुछ लोगों से राय जाननी चाही। इस मसले पर महिलाओं ने खुलकर राय रखी।
ट्रेनों में महिला यात्रियों के साथ आए दिन घटनाएं होती हैं। ट्रेन में महिलाओं के लिए अलग से रिजर्वेशन कोच होना चाहिए। इससे महिलाओं को सुरक्षा व्यवस्था को पुख्ता किया जा सके। इस कोच में टीटी भी महिला ही होनी चाहिए।
उषा कोहली, सेक्टर-41 निवासी
ट्रेन के खेल के बारे में सभी को पता है। रेल मंत्री को भी पता है। लेकिन, कोई सुनवाई नहीं हो रही है। धार्मिक यात्राओं पर पहले पैसे लेकर सुविधा कुछ भी नहीं देते हैं। इस पर कौन ध्यान देगा। चंडीगढ़ के लोग बड़ी संख्या में ट्रेन से सफर करते हैं।
गुरप्रीत सिंह हैप्पी, प्रधान पेंडू संघर्ष कमेटी चंडीगढ़
टिकट के लिए धक्के न खाने पड़े 'प्रभु' जी
रेल बजट से सभी को आस है। बेहतर सुविधाएं मिले। टिकट लेने के लिए धक्के न खाना पड़े ऐसा प्रावधान रेलवे को करना चाहिए। लोगों को अगर बेहतर सुविधाएं मिलेंगी तो सरकार की अलोचना करने का विपक्ष्ा को मौका नहीं मिलेगा।
डॉ. हुकम चंद, प्रधान, सरपंचों की को-ऑर्डिनेशन कमेटी
रेल बजट में कही गई सुविधाएं भी यात्रियों को नहीं दी जाती हैं। जबकि, उसके पैसे पहले ले लिए जाते हैं। इस महीने ट्रेन से धार्मिक यात्रा की, जिसमें परेशानियों का सामना करना पड़ा। आईआरसीटीसी से शिकायत की पर सुनवाई नहीं हुई। न खाना ठीक मिला न रेल में साफ सफाई। पीने के पानी तक की परेशानी थी। कुछ लोग मोदी सरकार को अभी से कोसने लगे हैं। अगर रेल बजट पर सरकार खरी नहीं तो लोग सरकार के खिलाफ लामबंद होने शुरू हो जाएंगे।
नामदेव ढींगरा, अध्यक्ष, कैलाश मानसरोवर यात्रा संगठन, चंडीगढ़