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राफेल का साक्षी बनेगा सेंट पॉल चर्च, 1965 और 71 के युद्ध का है गवाह

Tue, 28 Jul 2020 10:35 PM IST
ajay kumar संवाद न्यूज एजेंसी, अंबाला (हरियाणा)
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चर्च की पुरानी तस्वीर।
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1965 में भारत-पाक युद्ध की गवाही के बाद सैन्य क्षेत्र में बनी सेंट पॉल चर्च अब फ्रांस से आने वाले राफेल विमानों की भी साक्षी बनेगी। ये चर्च छावनी एयरफोर्स स्टेशन से महज एक किलोमीटर के दायरे में बनी हुई है। अपने जमाने में उत्तर भारत की सबसे खूबसूरत चर्च में से एक थी लेकिन भारत-पाक युद्ध में पाकिस्तान द्वारा बम गिराए जाने पर क्षतिग्रस्त हो गई थी। तभी से चर्च के साथ बने पादरी के कमरे को ही चर्च बनाया गया है। इससे पहले एयरफोर्स स्टेशन की लड़ाकू विमान मिग-21 व जगुआर भी शोभा बढ़ा चुके हैं। 

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वर्ष 1843 में अंबाला में जब कैंटोनमेंट बसा तो डायसिस ऑफ लाहौर के बिशप ने 1843 में चर्च ऑफ इंग्लैंड के नाम से 24 एकड़ जमीन खरीदी थी। उस वक्त अंग्रेजों द्वारा अंबाला में कैंटोनमेंट को बसाया जा रहा था। 14 जनवरी 1852 में चर्च का निर्माण शुरू किया गया था, जो 4 जनवरी 1857 को बनकर तैयार हुआ था। 

सेंट पॉल चर्च का निर्माण आर्किटेक्ट कैप्टन एटिंक्शन की देखरेख में किया गया था। इसका उद्घाटन तत्कालीन कलकत्ता के बिशप डेनियल एवं मद्रास के बिशप डेलेटरी ने किया था। यह गैरीसन यानी फौजियों का चर्च था, जिसे विशेषकर फौजी अफसरों की प्रार्थना के मद्देनजर ही बनाया गया था।
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आपात स्थितियों में अलर्ट के लिए काम आता था चर्च का घंटा 
देश के बंटवारे से पहले यह चर्च डायसिस ऑफ लाहौर की देखरेख में था लेकिन बाद में डायसिस ऑफ अमृतसर के अधीन आ गया। अब चर्च के प्रांगण में ही एयरफोर्स स्कूल भी चल रहा है और मौजूदा चर्च के पास सात एकड़ जमीन है। मौजूदा समय में जो चर्च है वहां आज भी बाइबल व चर्च के अंदर बैठने वाला टेबल है। वह घंटा भी मौजूद है जो चर्च के अलावा आपातकालीन स्थिति में बजाया जाता था लेकिन अब इसे नहीं बजाया जाता। 

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