हरियाणा स्कूल शिक्षा विभाग की ऑनलाइन तबादला नीति सवालों के घेरे में आ गई है। ऑनलाइन ट्रांसफर से पहले सैकड़ों पीजीटी के मैन्युअल तबादले किए गए हैं। जिससे नीति के औचित्य पर सवाल उठना लाजिमी है। सिफारिश पर किए गए तबादलों से सेकेंडरी शिक्षा निदेशालय के अधिकारी भी घिर गए हैं। निदेशालय की कार्यप्रणाली से अधिकांश लेक्चरर खफा हैं।
सोमवार को हरियाणा स्कूल लेक्चरर एसोसिएशन के नेतृत्व में दर्जनों लेक्चरर चंडीगढ़ स्थित सीएम निवास पहुंचे। हसला राज्य प्रधान दयानंद दलाल और हसला संरक्षक बीर सिंह राणा की अगुवाई में प्रतिनिधिमंडल प्रस्तावित ट्रांसफर पॉलिसी व रेशनेलाइजेशन की खामियों को लेकर सीएम के ओएसडी आलोक कुमार से मिला।
उन्होंने बताया कि छात्र हितों को ध्यान में रखकर बनाई गई पॉलिसी रेशनेलाइजेशन के कारण गले की फांस बन गई है। ऐसा लगता है कि शिक्षा विभाग के अधिकारी सीएम के शिक्षा में सुधारीकरण के सपने को फेल करने पर तुले हुए हैं। मैन्युअल ट्रांसफर कर पॉलिसी की पवित्रता को भंग किया गया है।
मुख्यमंत्री हस्तक्षेप कर सिफारिश के आधार पर हुए तबादलों को रद्द कराएं। आलोक वर्मा ने मांगों पर सकारात्मक रुख दिखाते हुए उसी समय निदेशक सेकेंडरी शिक्षा और अतिरिक्त निदेशक को फोन कर रेशनेलाइजेशन और ट्रांसफर संबंधित समस्याओं पर बैठक के निर्देश दिए। उन्होंने मंगलवार सुबह 11 बजे निदेशालय में मीटिंग के लिए हसला प्रतिनिधिमंडल का समय भी तय कराया।
स्कूल छोड़ने या विषय बदलने को मजबूर होंगे विद्यार्थी : दलाल
हसला राज्य प्रधान दयानंद दलाल ने वैज्ञानिकरण के समय व तरीके पर ही सवाल उठाए हैं। उन्होंने कहा कि इस समय स्कूलों में सक्षम परीक्षाएं, खेल प्रतियोगिताएं और मासिक परीक्षाओं का समय है। हाल ही में जो वैज्ञानिकरण किया गया है उससे प्रदेश में हजारों प्राध्यापकों की पोस्टों को मनमाने ढंग से समाप्त कर दिया गया है।
बेतुके फैसले से हजारों विद्यार्थी स्कूल छोड़ने को मजबूर होगें या फिर अपने विषय बदलने को। एक ओर 9वीं व दसवीं कक्षा प्राध्यापकों से पढ़वाई जा रही हैं और दूसरी ओर उच्च विद्यालयों से प्राध्यापकों की पोस्ट को ही समाप्त कर दिया गया है। उन्होंने कहा कि मंगलवार को मीटिंग के बाद ही हसला की राज्य कार्यकरिणी अगली रणनीति पर विचार करेगी।