पचास जगहों पर लग रहे नाके
शहर में इस समय करीब 50 जगहों पर पुलिस नाके लगाए जा रहे हैं। पुलिसकर्मी इन नाकों पर 24 घंटे ड्यूटी कर रहे हैं और शिफ्टों में तैनात हैं। पिछले एक महीने से यह नाके एक ही जगह पर फिक्स लगाए हुए हैं। सेक्टर-8/9, 9/10,18/19 और 36/37 जैसी डिवाइडिंग रोड के अलावा शहर में अलग अलग जगहों पररोजाना, दिन-रात एक ही जगह नाके लग रहे हैं। आम लोगों के साथ-साथ अपराधियों को भी इन नाकों की सटीक लोकेशन और टाइमिंग तक पता है। सब कुछ पता होने पर अपराधियों का दूसरे रास्तों से निकलना आसान हो जाता है।
कानूनी विशेषज्ञों की मानें तो नाका लगाने का उद्देश्य तभी पूरा होता है। जब इसे रोटेशनल रखा जाए।
रोटेशन में लगें नाके तो पुलिस रहेगी अलर्ट
बीपीआरडीओ की रिसर्च के अनुसार नाके 2 से 3 घंटे के लिए अलग-अलग जगहों पर लगाए जाने चाहिए, ताकि उनकी लोकेशन और टाइमिंग तय न हो। इससे अपराधियों के लिए बच निकलना मुश्किल हो जाता है और पुलिस भी ज्यादा सतर्क रहती है। बीपीआरडो की रिसर्च कहती है कि लंबे समय तक एक ही जगह खड़े रहने से पुलिसकर्मी इरिटेट हो जाते हैं और थकान भी हो जाती है। विशेषज्ञों का कहना है कई बार देखने को मिलता है कि नाकों के किनारे पुलिसकर्मी खड़े हैं और नाकों से वाहन चालक बिना चेकिंग के निकल रहे हैं। ऐसे में अगर दो से तीन घंटे के रोटेशनल नाके लगाए जाएं तो पुलिसकर्मी भी अलर्ट होकर नाके की ड्यूटी करेंगे और अपराधी भी पकड़े जाएंगे।
घटनाओं के बाद लगाए जा रहे 24 घंटे नाके
दरअसल 17 मार्च को पंजाब यूनिवर्सिटी में सोपू नेता पर फायरिंग और 18 मार्च को सेक्टर-9 में दिनदहाड़े चमनप्रीत उर्फ चिन्नी की हत्या के बाद प्रशासन ने सख्ती शुरू की थी। इन घटनाओं के बाद वरिष्ठ अधिकारियों को तलब कर शहरभर में 24 घंटे नाके लगाने के आदेश दिए गए। फिलहाल हर थाने के तहत दो और हर चौकी के अंतर्गत एक नाका लगाया जा रहा है। नाकों पर लगातार चालान भी किए जा रहे हैं।