चंडीगढ़। पीयू में 11 फैकल्टी डीन और सेक्रेटरी के चुनाव स्थगित किए जाने पर पंजाब यूनिवर्सिटी टीचर्स एसोसिएशन (पुटा) में आक्रोश है। पुटा ने पीयू प्रशासन के इस फैसले का विरोध जताते हुए वीसी प्रो. राजकुमार को पत्र लिखा है।
पत्र में पुटा ने लिखा है कि पीयू ने नियमों के अनुसार 60 वर्ष की उम्र के शिक्षकों को शामिल नहीं किया जबकि इन शिक्षकों को कोर्ट से स्टे मिला हुआ था। इसके बाद कोर्ट के शुक्रवार को चुनावी प्रक्रिया में शिक्षकों को शामिल निर्देश के बाद उसे लागू करने की बजाय चुनाव ही स्थगित कर दिए गए। पिछले दो साल से बिना फैकल्टी डीन के शैक्षणिक कार्यप्रणाली के साथ शिक्षकों के कैश प्रमोशन लंबित पड़े हैं। इससे शोध और अकादमिक गतिविधियां प्रभावित हो रही हैं। पीयू के 60 वर्ष से अधिक उम्र के शिक्षक कोर्ट से स्टे लेकर आए हुए हैं, इसके बावजूद पीयू प्रशासन ने चालाकी से उन्हें चुनावी प्रक्रिया से बाहर कर दिया।
बता दें पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट की ओर से शुक्रवार को चुनावी प्रक्रिया में 60 से ऊपर के शिक्षकों को शामिल करने के निर्देश दिए गए। पीयू ने शिक्षकों को शामिल करने की बजाय चुनाव ही स्थगित कर दिए। ऐसे में पीयू की अकादमिक गतिविधियों को इसका नुकसान झेलना पड़ेगा। शिक्षकों और पीयू अकादमिक को देखते हुए फैकल्टी डीन की चुनावी प्रक्रिया को जल्द आयोजित करवाना चाहिए।
पीयू को हाईकोर्ट को 23 मार्च को देना है जवाब
पीयू में फैकल्टी डीन चुनाव के लिए तैयार मतदाता सूची में 60 वर्ष से अधिक आयु के प्रोफेसरों का नाम शामिल न करने को चुनौती देने वाली याचिका पर हाईकोर्ट में शुक्रवार को सुनवाई हुई थी। हाईकोर्ट ने पीयू के वीसी, रजिस्ट्रार व अन्य को 23 मार्च के लिए नोटिस जारी कर जवाब दाखिल करने का आदेश दिया है। इसके साथ ऐसे प्रोफेसरों के नाम मतदाता सूची में शामिल करने का आदेश दिया है। पीयू के प्रो. केशव मल्होत्रा व अन्य प्रोफेसरों ने हाईकोर्ट में याचिका दाखिल कर बताया कि पीयू ने 60 वर्ष से ऊपर की आयु के सभी प्रोफेसरों के नाम फैकल्टी की मतदाता सूची से हटा दिए हैं।