पंजाब यूनिवर्सिटी की रैंकिंग गिरने का सबसे बड़ा कारण इसी छवि खराब होना रहा है। साल भर पीयू वित्तीय संकट और दूसरे कारणों की वजह से धरने प्रदर्शन का अखाड़ा बना रहा जिससे वैश्विक स्तर पर पीयू की छवि को क्षति पहुंची। एमएचआरडी की नेशनल इंस्टीट्यूशनल रैंकिंग फ्रेमवर्क (एनआईआरएफ) में पीयू को वर्ष 2016 में छवि के लिए 97 अंक मिले थे जो 2017 में घटकर महज 18.99 रह गए। इतने अंकों की एकसाथ गिरावट ने ओवरऑल परफार्मेंस को भी नुकसान पहुंचाया। इससे पीयू को पिछले साल के 12 रैंक के मुकाबले इस बार 33वां रैंक मिला है।
रिसर्च एंड प्रोफेशनल प्रेक्टिस में भी 50 प्रतिशत से अधिक नंबर कट गए। 2016 में इस क्षेत्र के लिए 84.89 अंक मिले थे जो इस वर्ष 40.70 ही रह गए। रिसर्च से ही यूनिवर्सिटी का नाम बड़ा होता है लेकिन इस बार रिसर्च वर्क बजट की वजह से काफी प्रभावित हुआ। बताया जा रहा है कि कई प्रोजेक्ट अधर में ही हैं। टीचिंग एंड लर्निंग रिसोर्सेज में भी पीयू का प्रदर्शन अच्छा नहीं रहा। इसमें पीयू को इस बार 36.70 अंक मिले जबकि पिछले साल 56.18 अंक मिले थे। स्टाफ की कमी से पीयू लगातार जूझता रहा है। किसी भी नए पद की सेंक्शन नहीं मिल रही है।
रैंकिंग में मिले इस साल और पिछले साल के नंबर
क्षेत्र 2017 2016
टीचिंग एंड लर्निंग रिसोर्सेस 36.70 56.18
रिसर्च एंड प्रोफेशनल प्रेक्टिस 40.70 84.89
ग्रेजुएशन आउटकम 66.18 81.93
आउटरिच एंड इनक्ल्यूसिविटी 47.40 76.32
छवि 18.99 97