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550वें प्रकाश पर्व पर पंजाब सरकार रिहा करेगी 550 कैदी, कैप्टन ने गृहमंत्री का किया धन्यवाद

Sun, 29 Sep 2019 03:05 PM IST
ajay kumar न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़
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गृहमंत्री अमित शाह और कैप्टन अमरिंदर सिंह - फोटो : अमर उजाला (फाइल फोटो)
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श्री गुरु नानक देव जी के 550वें प्रकाश पर्व के संबंध में देश में नौ सिख कैदियों को विशेष माफी देने संबंधी राज्य सरकार के प्रस्ताव को स्वीकृत करने के लिए केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह का धन्यवाद करते हुए पंजाब के मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर सिंह ने शनिवार रात गुरु पर्व के ऐतिहासिक मौके पर अपनी सरकार द्वारा 550 कैदियों को रिहा करने के फैसले का भी एलान किया।

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मुख्यमंत्री ने टाडा के अधीन कैदी, जो अपनी सजा पूरी कर चुके हैं और जिनकी रिहाई पंजाब या देश की अमन-शांति व सुरक्षा के लिए हानिकारक नहीं है, को रिहा किए जाने संबंधी राज्य सरकार के प्रस्ताव को स्वीकार करने के लिए केंद्र सरकार की सराहना की। उल्लेखनीय है कि 14 सितंबर, 2019 को एक पत्र द्वारा मुख्यमंत्री ने अमित शाह को मानवीय आधार पर राज्य सरकार के औपचारिक प्रस्ताव को स्वीकार करने की अपील की थी। केंद्र सरकार ने अब एक कैदी की मौत की सजा को उम्रकैद में बदलने और आठ अन्य को समय से पहले रिहा करने का फैसला किया है। 

केंद्र द्वारा प्रस्ताव को स्वीकार करने के लिए अमित शाह का धन्यवाद करते हुए कैप्टन ने कहा की यह कैदी अपना समय जेलों में बीता चुके हैं और अब बुजुर्ग अवस्था में हैं, जो अपने परिवारों के साथ फिर मिल-बैठने और अपने बच्चों के साथ बाकी जीवन बिताने के हकदार हैं। उन्होंने कहा की यह व्यक्ति समाज के लिए किसी भी तरह का खतरा नहीं हैं और श्री गुरु नानक देव जी का 550वें प्रकाश पर्व के पवित्र के मौके पर यह कदम गुरु साहिब के रहमदिली के फलसफे के पूरी तरह अनुकूल है। 

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मुख्यमंत्री की यह प्रतिक्रिया केंद्रीय गृह मंत्रालय के एक पत्र के संदर्भ में सामने आई, जिसमें यह फैसला किया गया कि मानवीय आधार पर श्री गुरु नानक देव जी के 550वें प्रकाश पर्व के मौके पर देश की विभिन्न जेलों से 9 सिख कैदियों की रिहाई के विशेष इंतजाम किये जाएं। इन कैदियों की रिहायी के लिए संबंधित राज्य सरकारों और केंद्र शासित प्रदेशों को पत्र भेजा गया है।

18-28 साल की सजा भुगत चुके हैं कैदी
टाडा कैदियों में से कई 18 से 28 साल तक उम्र कैद की सजा भुगत चुके हैं और पंजाब सरकार ने अपने प्रस्ताव में कहा था कि सरकार यह महसूस करती है कि भारत सरकार के गृह मंत्रालय को लंबे समय से जेलों में बंद ऐसे दोषियों/ कैदियों को रिहा कर दिया जाना चाहिए, जो राज्य सरकार के मुताबिक समाज के लिए किसी तरह का खतरा नहीं हैं। प्रस्ताव में यह भी कहा गया था कि राज्य सरकार को सुप्रीम कोर्ट के विभिन्न फैसलों और कानून की पालना में केंद्रीय गृह मंत्रालय की तरफ से यदि इन कैदियों को रिहा किया जाता है, तो उसे कोई एतराज नहीं होगा। 
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