ट्रांसपोर्ट मंत्री ने कहा कि कर्मचारी नेता अगर बात करना चाहते हैं तो उनके लिए दरवाजे खुले हैं। उधर, कर्मचारी यूनियन के प्रधान रेशम सिंह गिल ने बताया कि उन्होंने 21 जून को ट्रांसपोर्ट मंत्री के साथ बैठक करके सभी मांगों की जानकारी दी थी। विभाग के अधिकारी भी लंबे समय से उन्हें बार-बार मांगें मान लिए जाने के आश्वासन देते रहे हैं लेकिन आज तक किसी मांग को माना नहीं गया है।
हड़ताल से सात जिले सबसे ज्यादा प्रभावित
मंगलवार को पनबस की हड़ताल का सबसे ज्यादा असर सात जिलों- लुधियाना, जालंधर, पटियाला, अमृतसर, बठिंडा, फिरोजपुर और मोगा में दिखाई दिया। पनबस के करीब 3000 कर्मचारी हड़ताल में शामिल हो गए हैं। हड़ताल से अंतरराज्यीय रूटों के साथ-साथ राज्य के भीतर बस सेवा बुरी तरह प्रभावित हुई है।
हड़ताली कर्मचारियों ने विभिन्न शहरों और कस्बों में रोडवेज की बसों को चलने नहीं दिया। हड़ताल कर रहे कर्मचारियों की यूनियन के नेताओं का कहना है कि कैप्टन सरकार वादों से मुकर रही है। राज्य के 18 रोडवेज डिपो में इस हड़ताल से मंगलवार को वित्तीय नुकसान भी उठाना पड़ा।
ये हैं कर्मचारियों की मांगें
कर्मचारी यूनियन के प्रधान रेशम सिंह गिल ने बतया कि वे लंबे समय से सरकार के सामने अपनी मांगें रखते आ रहे हैं लेकिन उन्हें कोरे आश्वासन ही मिलते रहे हैं।
उन्होंने बताया कि उनकी मुख्य मांगों में- कच्चे कर्मचारियों को पक्का करना, कर्जमुक्त पनबस को पूरे स्टाफ के साथ रोडवेड के अधीन लाना, वेतन वृद्धि, ठेका सिस्टम खत्म करके कर्मचारियों को ड्यूटी पर बहाल करना। उन्होंने आरोप लगाया कि कच्चे कर्मचारियों को नियमित करने की मांग को छोड़कर बाकी सभी मांगों के बारे में ट्रांसपोर्ट विभाग टालमटोल कर रहा है।
पंजाब रोडवेज की बसों का प्रदेश भर में भले ही तीन दिनों तक चक्का जाम रहेगा लेकिन रोडवेज मुलाजिमों की यह हड़ताल पटियाला में बेअसर रही। दरअसल पटियाला समेत आसपास के कस्बों में पेप्सू रोड ट्रांसपोर्ट कारपोरेशन (पीआरटीसी) की बसों की ही सरदारी है। इस कारण सवारियों को बसें मिलने में किसी तरह की कोई परेशानी पेश नहीं आई।