कॉरिडोर खोलते समय और अक्तूबर, 2019 में द्विपक्षीय समझौते पर हस्ताक्षर करते समय यह फैसला लिया गया था कि दोनों ही पक्ष अपनी तरफ बुनियादी सुविधाओं का निर्माण कराएंगे। इसके मुताबिक पाकिस्तान को अपनी तरफ बुधी-रावी नाले पर अभी पुल का निर्माण कराना है। भारत ने अपनी तरफ तो पुल का निर्माण करवा दिया है लेकिन पाकिस्तान ने अभी अपना वादा पूरा नहीं किया है।
यह हुए थे समझौते
- कोई भी भारतीय किसी भी धर्म या मजहब को मानने वाला हो, उसे इस यात्रा के लिए वीजा की जरूरत नहीं होगी।
- यात्रियों के लिए पासपोर्ट और इलेक्ट्रॉनिक ट्रैवल ऑथराइजेशन (ईटीए) की जरूरत होगी। यह कॉरिडोर पूरे साल खुला रहेगा।
- भारतीय विदेश मंत्रालय यात्रा करने वाले श्रद्धालुओं की लिस्ट 10 दिन पहले पाकिस्तान को देगा। हर श्रद्धालु को 20 डॉलर यानी करीब 1400 रुपये देने होंगे।
- एक दिन में पांच हजार लोग इस कॉरिडोर के जरिए दर्शन करने जा सकेंगे।
- अभी अस्थायी पुल का इस्तेमाल किया जा रहा है और आने वाले वक्त में एक स्थायी पुल बनाया जाएगा।
- श्रद्धालुओं को इस यात्रा के लिए ऑनलाइन पोर्टल पर रजिस्ट्रेशन करवाना होगा
- आवेदकों के मेल और मैसेज के जरिए चार दिन पहले उनके आवेदन के कन्फर्मेशन की जानकारी दी जाएगी।
भारत में कोरोना वायरस के खतरे को देखते हुए 15 मार्च को करतारपुर कॉरिडोर को बंद करने का फैसला लिया गया था। पहले इसे 31 मार्च तक बंद किया गया था लेकिन बाद में अनिश्चितकाल के लिए बंद रखने का फैसला किया गया। हालांकि 29 जून को शेर-ए-हिंदुस्तान महाराजा रणजीत सिंह की पुण्यतिथि पर पाकिस्तान की तरफ से कॉरिडोर को खोलने की बात कही गई थी लेकिन तब भारत सरकार ने इसे छलावा करार देते हुए सिरे से खारिज कर दिया था। फिर तीन अक्तूबर को पाकिस्तान की तरफ से दोबारा कहा गया कि कोरोना में सुधार होते ही कॉरिडोर खोल दिया जाएगा।
सिख तालमेल कमेटी के प्रधान तजिंदर सिंह परदेसी, हरपाल सिंह चड्ढा और हरप्रीत सिंह नीटू ने कहा कि संगत दर्शन को तरस रही है। अब स्कूल कॉलेज व मैरिज पैलेस तक खुल गए हैं तो करतारपुर कॉरिडोर भी तत्काल खोला जाना चाहिए।