पंजाब की नई सरकार से चंडीगढ़ प्रशासन भी बड़ी आस लगाए हुए है। चंडीगढ़ प्रशासन ने अधिकारियों का पैनल भेजने का रिमाइंडर राज्य सरकार के पास भेज दिया है।
चंडीगढ़ प्रशासन पिछले कई सालों से अधिकारियों की कमी से जूझ रहा है। वित्त सचिव जैसे महत्वपूर्ण पद के लिए भी अधिकारियों का पैनल नहीं भेजा गया है। 30 जनवरी को वित्त सचिव सर्वजीत सिंह कार्यकाल पूरा करने के बाद पंजाब वापस लौट गए थे। तब से अब तक चंडीगढ़ में वित्त सचिव का पद खाली है। वह भी ऐसे समय में जब नई एक्साइज पॉलिसी बननी है। गृह सचिव अनुराग अग्रवाल वित्त सचिव का अतिरिक्त कार्यभार संभाल रहे हैं।
वित्त सचिव के साथ दूसरे कई सेक्रेटरी स्तर के अधिकारियों की कमी से यूटी प्रशासन जूझ रहा है। सेक्रेटरी स्तर के अधिकारी नहीं होने से सभी पॉलिसी लटकी हुई हैं। जो काम एक सप्ताह का है उसमें छह महीने लग रहे हैं। कार्यकाल खत्म होने या बीच में ही अधिकारी वापस जा रहे हैं, उनके बदले में अधिकारी नहीं मिल रहे हैं। वित्त सचिव के लिए कार्यकाल खत्म होने से तीन महीने पहले पैनल मांगा गया था। लेकिन अधिकारी जाने के दो महीने बाद भी अधिकारी नहीं मिला है। जो पैनल पंजाब ने भेजा था उसमें प्रमोट हुए अधिकारियों के नाम होने से वापस भेजना पड़ा था।
सोशल वेलफेयर सेक्रेटरी रहीं भावना गर्ग और ज्वाइंट सेक्रेटरी एस्टेट डा. अदप्पा कार्तिक की जगह भी अधिकारी नहीं मिले हैं। यह दोनों पद पिछले करीब 8 महीने से खाली हैं। यूटी कैडर के अधिकारी के नरसिम्हा और प्रिंस धवन की जगह भी कोई अधिकारी नहीं मिला है। एसएसपी ट्रैफिक का पद भी नहीं भर पाया है। पीसीएस स्तर पर भी तीन अधिकारियों की कमी है। जिस कारण एक अधिकारी 8 से अधिक विभाग संभाल रहा है।