18वीं लोकसभा के पहले सत्र की शुरुआत सोमवार को नवनिर्वाचित सांसदों के शपथ लेने के साथ हो चुकी है। पंजाब के सभी 13 सांसदों को शपथ के लिए 25 जून मंगलवार का समय दिया गया है। इसमें खडूर साहिब से जीते निर्दलीय सांसद वारिस पंजाब दे के प्रमुख अमृतपाल सिंह के शामिल होने की संभावना नहीं है। अमृतपाल नेशनल सिक्योरिटी एक्ट (एनएसए) के तहत असम की डिब्रूगढ़ जेल में बंद हैं।
अमृतपाल के वकील गुरप्रीत सिंह संधू ने बताया कि उन्होंने अमृतसर में जिला मजिस्ट्रेट के पास अर्जी दी थी कि अमृतपाल को सांसद पद की शपथ दिलाने के लिए इंतजाम किए जाएं, लेकिन उनकी अर्जी के संबंध में कोई जवाब नहीं आया। अगर संसद सत्र के दौरान अमृतसर को शपथ नहीं दिलाई गई तो वे पंजाब व हरियाणा हाईकोर्ट का रुख करेंगे।
अमृतपाल के एडवोकेट ने कहा कि संवैधानिक तौर पर सांसद बनने के लिए अमृतपाल सिंह को पहले शपथ लेनी होगी। चुनाव जीतने का मतलब है कि जेल में होने के बावजूद, अमृतपाल सिंह के पास अब संसद सदस्य के रूप में संवैधानिक जनादेश है। जेल में बंद किसी निर्वाचित संसद सदस्य के शपथ लेने के बारे में संविधान में कोई अलग से निर्णय नहीं है, लेकिन पिछले उदाहरणों पर नजर डालें तो ऐसे कई नेता हैं जिन्होंने जेल में रहते हुए शपथ लेने के लिए अस्थायी पैरोल ली थी।
सरकार ने बढ़ाया एनएसए
अमृतपाल सिंह मार्च 2023 से एनएसए के तहत असम की डिब्रूगढ़ जेल में बंद हैं। एनएसए एक सख्त कानून है जो सरकार को व्यक्तियों को बिना किसी औपचारिक आरोप के 12 महीने तक हिरासत में रखने की अनुमति देता है, लेकिन अब जब अमृतपाल सिंह एक साल से अधिक समय से जेल में हैं तो सरकार ने एनएसए को दूसरी बार एक साल के लिए बढ़ा दिया है।
सभी सांसदों को फोन पर दी है जानकारी
कानून के मुताबिक अमृतपाल सिंह संसदीय कार्यालय द्वारा भेजी गई 25 जून की समय सीमा के भीतर न तो जेल से बाहर आ पाएंगे और न ही शपथ ले पाएंगे। कानूनी विशेषज्ञों के मुताबिक हर नवनिर्वाचित संसद सदस्य को संसदीय कार्यालय की ओर से शपथ लेने का समय दिया जाता है। पंजाब के सभी सांसदों को 25 जून का समय दिया गया है। संसदीय कार्यालय की ओर से सभी सांसदों को समय की जानकारी फोन पर भी दी गई है, जो अमृतपाल सिंह द्वारा रजिस्टर्ड फोन नंबर पर भी दी गई है। सूत्रों के मुताबिक अमृतपाल सिंह एनएसए के तहत जेल में हैं, जिसके चलते वह शपथ लेने के लिए जेल से नहीं आ पाएंगे।
स्पीकर को पत्र लिखना होगा
कानून के अनुसार शपथ लेने की अनुमति जमानत पर रिहाई के समान नहीं है। यह एक दिन की विशेष पैरोल के समान है। जेल में बंद सांसद को संसद में हर कदम पर अलग-अलग जगहों से इजाजत लेनी पड़ती है। अगर वे संसद से अनुपस्थित रहना चाहते हैं तो उन्हें इसके लिए स्पीकर को पत्र लिखना होगा। संविधान के अनुच्छेद 101 (4) में कहा गया है कि यदि कोई संसद सदस्य बिना अनुमति के 60 दिनों से अधिक समय तक सभी बैठकों से अनुपस्थित रहता है, तो उसकी सीट रिक्त घोषित कर दी जाएगी।
ये लेंगे शपथ
आम आदमी पार्टी के तीन सांसद राजकुमार चब्बेवाल, गुरमीत सिंह मीत हेयर, मलविंदर सिंह कंग, कांग्रेस के अमरिंदर सिंह राजा वड़िंग, चरणजीत सिंह चन्नी, गुरजीत औजला, सुखजिंदर सिंह रंधावा, अमर सिंह, शेर सिंह घुबाया, धर्मवीर गांधी, शिअद से हरसिमरत कौर बादल और आजाद प्रत्याशी सरबजीत सिंह खालसा।