अन्य कैदियों का जिक्र करते हुए जेल मंत्री ने कहा कि स्नैचिंग और जेब काटने के दोष में सजा काट रहे कैदियों को इस आधार पर रिहा किया जा सकता कि वे सुबह-शाम जेल में पहुंचकर हाजिरी दें। उनका कहना है कि पंजाब की जेलों में कैदियों को रखने की कुल क्षमता लगभग 23000 कैदी है, लेकिन इस समय जेलों में 24600 कैदी बंद हैं।
नशेड़ियों में कम होती है रोग प्रतिरोधक क्षमता
जेल मंत्री ने कहा कि जेलों में बंद नशेड़ी जिन्हें नशीले पदार्थों के साथ पकड़े जाने के कारण सजा हुई है, उन्हें मौजूदा हालात में जेलों से रिहा करना बहुत जरूरी है। उन्होंने कहा कि देखा गया है कि नशे के आदी लोग शारीरिक तौर पर बहुत कमजोर होते हैं और इन्हें रोग भी जल्दी पकड़ते हैं। उन्होंने कहा कि ऐसे कैदियों को जेलों से रिहा कर दिया जाना जरूरी है ताकि अन्य कैदियों को कोई नुकसान न हो।
बच्चों को घर पर मिड-डे मील देने पर विचार
मुख्यमंत्री ने कहा कि उनकी सरकार राज्य के सरकारी स्कूलों के विद्यार्थियों को उनके घरों में ही मिड-डे-मील मुहैया करवाने या इसके बदले उनके बैंक खातों में पैसे डालने पर भी विचार रही है। हालांकि उन्होंने यह भी कहा कि इस संबंध में सरकार को फिलहाल ऐसी कोई विनती प्राप्त नहीं हुई है।
राज्य सरकार छोटे मामलों में दोषी ठहराए गए लोगों को जमानत देने और जेल में काफी समय बिताने वाले दोषियों को पैरोल देने पर विचार कर रही है। अंतिम फैसला अदालतों पर निर्भर है और राज्य के एडवोकेट जनरल अतुल नंदा यह मामला पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस के पास उठा रहे हैं। -कैप्टन अमरिंदर सिंह, मुख्यमंत्री, पंजाब।