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Punjab: मुक्तसर, मानसा और संगरूर में Hepatitis के सबसे ज्यादा मरीज, नशे की लत काफी हद तक जिम्मेदार

Sat, 19 Aug 2023 04:38 PM IST
निवेदिता वर्मा वीणा तिवारी, अमर उजाला, चंडीगढ़

सार

प्रो. आर्का डे ने बताया कि दयानंद मेडिकल कॉलेज (डीएमसी) एंड हॉस्पिटल, लुधियाना में गैस्ट्रोएंटरोलॉजी विभाग के प्रमुख डॉ. अजीत सूद ने अपने सर्वे में पंजाब में इसकी स्थिति को स्पष्ट किया है। उनके सर्वे में मानसा जिले के गांव से ज्यादा शहर और मोगा में शहर से ज्यादा गांव में हेपेटाइटिस सी के संक्रमण की पुष्टि हुई है।
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हेपेटाइटिस-सी - फोटो : iStock
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विस्तार
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पंजाब में हेपेटाइटिस सी तेजी से लोगों को शिकार बना रहा है। पीजीआई में इलाज के लिए आने वाले मरीजों में पंजाब के मरीजों की संख्या सबसे ज्यादा है। इनमें प्रदेश के मुक्तसर, मानसा और संगरूर जिले सबसे ज्यादा प्रभावित हैं।

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विशेषज्ञों के अनुसार इस मर्ज की चपेट में शहर के साथ गांव के लोग भी आ रहे हैं। चिंता की बात यह है कि कुछेक जिलों में तो शहर के बजाय गांव में मरीजों की संख्या ज्यादा है। इससे साफ पता चल रहा है कि जागरूकता के अभाव में यह मर्ज बढ़ रहा है। पीजीआई हेपेटोलॉजी विभाग के प्रो. आर्का डे ने कहा कि आशंका है कि पंजाब में हेपेटाइटिस सी के तेजी से बढ़ रहे संक्रमण के लिए नशे की लत काफी हद तक जिम्मेदार है।

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प्रो. आर्का डे ने बताया कि दयानंद मेडिकल कॉलेज (डीएमसी) एंड हॉस्पिटल, लुधियाना में गैस्ट्रोएंटरोलॉजी विभाग के प्रमुख डॉ. अजीत सूद ने अपने सर्वे में पंजाब में इसकी स्थिति को स्पष्ट किया है। उनके सर्वे में मानसा जिले के गांव से ज्यादा शहर और मोगा में शहर से ज्यादा गांव में हेपेटाइटिस सी के संक्रमण की पुष्टि हुई है। यह स्थिति अन्य जिलों में भी है, इसलिए यह कहा जा सकता है कि गांव में शिक्षा के अभाव के कारण युवा असुरक्षित तरीकों का प्रयोग कर संक्रमण की चपेट में आ रहे हैं। ऐसे में जागरूकता कार्यक्रम बेहद जरूरी हैं।

हेपेटाइटिस सी आप भी जान लें
हेपेटाइटिस सी रक्तजनित संक्रमण है, जो हेपेटाइटिस सी वायरस (एचसीवी) के कारण होता है। यह एक प्रकार का वायरस हेपेटाइटिस है जो दूषित रक्त से फैलता है।

ये हैं कारण 
-संक्रमित सुइयों और सीरिंज का उपयोग करना
- नॉन स्टरलाइज सर्जिकल उपकरण या एचसीवी वायरस से संक्रमित अन्य दवा सामग्री।
- दूषित खून चढ़ाने से
- यदि किसी व्यक्ति को गलती से संक्रमित सुई चुभ जाती है
- एक हेपेटाइटिस सी संक्रमित व्यक्ति पर इस्तेमाल किए गए गैर-कीटाणुरहित स्याही या औजारों से गोदना या छेद किए जाने से
- संक्रमित व्यक्ति के रक्त या खुले घावों के संपर्क में आना
- हेपेटाइटिस सी से संक्रमित रेजर, टूथब्रश, नेल क्लिपर्स, या मैनिक्योरिंग या पेडीक्योरिंग उपकरण के उपयोग से
- एचसीवी मां से अजन्मे बच्चे को दिया जाता है
- एचसीवी संक्रमण वाले व्यक्ति के साथ असुरक्षित यौन संबंध से

बचाव है संभव
- बॉडी पियर्सिंग और टैटू बनवाते समय सावधानी बरतें।
- असुरक्षित यौन संबंध से बचें
- अवैध दवाओं के प्रयोग से बचें
- संक्रमित सुई, सीरिंज, रेज़र, टूथब्रश, मैनिक्योरिंग या पेडीक्योरिंग उपकरण का उपयोग न करें।
- शराब के सेवन और धूम्रपान से दूर रहें
- नियमित रक्त परीक्षण करने से बीमारी को रोकना संभव है।

जांच का आसान तरीका
हेपेटाइटिस की जांच बहुत आसानी से एक ब्लड टेस्ट से हो सकती है। ब्लड सैंपल देकर मात्र दो मिनट में परिणाम मिल सकते हैं। इस जांच को एचसीवी एंटीबॉडी टेस्ट कहा जाता है। इससे यह भी पता लगाया जा सकता है कि क्या कोई व्यक्ति कभी हेपेटाइटिस सी वायरस से संक्रमित हुआ है। यह एक कारगर तरीका है। इसके अलावा हेपेटाइटिस सी की वजह से लिवर को हुए नुकसान का पता अल्ट्रासोनोग्राफी से लगाया जा सकता है। वहीं शुरुआती खराबी का फाइब्रोस्कैन से पता लगाया जा सकता है।

इलाज उपलब्ध है
विशेषज्ञों के अनुसार चिकित्सा क्षेत्र में हुए नए शोध और प्रयोगों ने हेपेटाइटिस के इलाज को लेकर भी बहुत आशाजनक परिणाम दिए हैं। भले ही हेपेटाइटिस सी के लि अभी वैक्सीन नहीं है, लेकिन ऐसी दवाइयां हैं, जो हेपेटाइटिस को मरीज के शरीर से 90-100 प्रतिशत तक हटा सकती हैं और मरीज को स्वस्थ कर सकती हैं। जरूरी यह है कि समय पर और सही इलाज मिले।

पंजाब में हेपेटाइटिस सी के आंकड़े बेहद गंभीर
जिला                  गांव में                          शहर में

मानसा              2.95 प्रतिशत                 13.64 प्रतिशत
मुक्तसर             3.26 प्रतिशत                 12.45 प्रतिशत
मोगा                8.86 प्रतिशत                       0
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संगरूर              5.73 प्रतिशत                  2.83 प्रतिशत
अमृतसर            3.15 प्रतिशत                  0.28 प्रतिशत
तरनतारन           4.11 प्रतिशत                     00
लुधियाना            2.16 प्रतिशत                   0.2 प्रतिशत


हेपेटाइटिस सी ऐसा मर्ज है, जिससे संक्रमित होने के बाद समुचित इलाज न होने पर स्थिति गंभीर हो सकती है। पीजीआई में इलाज की आधुनिक तकनीकों का उपयोग कर मरीजों को बेहतर इलाज मुहैया कराने का प्रयास किया जा रहा है। इसके बावजूद यह बात ठीक से समझनी होगी कि इस संक्रमण से बचाव के उपाय बेहद आसान हैं इसलिए जागरूक बनिए सुरक्षित रहिए। - प्रो. अजय दुसेजा, प्रमुख हेपेटोलॉजी विभाग पीजीआई

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