फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

Chandigarh News: विश्वविद्यालय के मुद्दे को सुलझाने के लिए फिर एक मंच पर आएंगे पंजाब हरियाणा

विज्ञापन
विज्ञापन
पंजाब के राज्यपाल दोनों राज्यों के मुख्यमंत्री को बैठक के लिए बुलाएंगे
विज्ञापन


हरियाणा के कॉलेजों की मान्यता दिलाने का मामला,

अमर उजाला ब्यूरो

चंडीगढ़। चंडीगढ़ स्थित पंजाब विश्वविद्यालय में हरियाणा की हिस्सेदारी के विवाद को सुलझाने के लिए एक बार फिर पंजाब और हरियाणा के मुख्यमंत्री एक मंच होंगे। पंजाब के राज्यपाल गुलाब चंद कटारिया जल्द ही दोनों राज्यों के मुख्यमंत्रियों के साथ-साथ मुख्य सचिवों की बैठक बुलाएंगे। संभावना है कि इस बैठक के लिए जल्द ही तारीख तय कर दी जाएगी।

दरअसल, हरियाणा सरकार अपने प्रदेश के कॉलेजों को मान्यता दिलाने और विवि की सीनेट में राज्य का हिस्सा बहाल करने की मांग कर रहा है। इसको लेकर पहले भी पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत मान और हरियाणा के तत्कालीन मुख्यमंत्री मनोहर लाल के बीच बैठक हो चुकी है। उस समय कोई समाधान नहीं निकल पाया था। अब हाल ही में चंडीगढ़ में हुई उत्तरी क्षेत्रीय परिषद (एनजेडसी) की स्थायी समिति की बैठक में यह निर्णय लिया गया कि राज्यपाल कटारिया इन दोनों मुद्दों को हल करने के लिए दोनों मुख्यमंत्रियों के साथ बैठक की अध्यक्षता करेंगे। पंजाब विधानसभा ने भी 30 जून 2023 को एक प्रस्ताव पारित कर पीयू की मौजूदा स्थिति को बदलने के किसी भी प्रयास का विरोध किया था। इसका कारण 1973 में गृह मंत्रालय द्वारा जारी एक अधिसूचना है, जिसके तहत हरियाणा ने पीयू से अपनी संबद्धता खो दी थी।
विज्ञापन


केंद्र से जुड़ा है अनुदान का मामला

पंजाब विश्वविद्यालय के लिए अनुदान का मामला केंद्र और पंजाब सरकार से जुड़ा हुआ है। चालू वित्त वर्ष 2023-24 में केंद्र ने पीयू को मिलने वाले वार्षिक अनुदान को 294 करोड़ रुपये से बढ़ाकर 346 करोड़ रुपए कर दिया है, जिसमें 6 प्रतिशत की वार्षिक वृद्धि का प्रावधान है। इसके अलावा, पंजाब सरकार भी पीयू के लिए वित्तीय सहायता के लिए विचार कर रही है।
विज्ञापन


बाक्स

हरियणा वित्तीय सहायता के बदले मांग रहा कालेजों की संबंद्धता

हरियाणा सरकार ने वित्तीय सहायता के बदले पंचकूला, अंबाला और यमुनानगर जिलों के कॉलेजों को पीयू से संबद्धता देने की मांग रखी है। हालांकि, पंजाब सरकार इसका विरोध कर रही है। इसलिए बैठक के बाद भी इस मुद्दे पर कोई सहमति नहीं बन पाई है। मनोहर लाल ने विश्वविद्यालय के कुल व्यय का 40 प्रतिशत तक योगदान देने का प्रस्ताव रखा था, लेकिन पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत मान ने इसे अस्वीकार कर दिया था।
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें