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नाभा जेल ब्रेकः फरार कैदी के पिता की अपील पर हाईकोर्ट का बड़ा फरमान

Fri, 02 Dec 2016 01:59 PM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, चंडीगढ़
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जानकारी देती पुलिस - फोटो : अमर उजाला
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नाभा सेंट्रल जेल से 27 नवंबर को पांच गैंगस्टर के साथ फरार हुए कैदी के पिता की अपील पर हाईकोर्ट ने एक बड़ा फरमान जारी किया है। दरअसल, पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट ने मामले में पंजाब सरकार की ओर से गठित विशेष जांच दल की केस डायरी तलब की है।
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कुलप्रीत सिंह उर्फ नीटा देओल के पिता की दलील है कि कुलप्रीत सिंह पंजाब पुलिस की हिरासत में है। गिरफ्तारी के बावजूद उसकी हिरासत नहीं दिखाई गई है। ऐसे में उन्हें डर है कि एनकाउंटर की कार्रवाई दिखाकर पुलिस उसकी हत्या भी करा सकती है।

इस बीच पंजाब सरकार की ओर से हाईकोर्ट में कहा है कि नीटा की गिरफ्तार अभी नहीं हो सकी है। याची के आरोप बेबुनियाद हैं। हाईकोर्ट ने शनिवार को एसआईटी को हाईकोर्ट में केस डायरी पेश करने के निर्देश दिए हैं।
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हाईकोर्ट ने पंजाब सरकार से पूछा ये सवाल

नाभा जेल कांड की जांच करती पंजाब पुलिस - फोटो : amarujala
वीरवार को नीटा के पिता की याचिका पर सुबह सुनवाई आरंभ हुई। हाईकोर्ट ने इस पर पंजाब सरकार से पूछा कि क्या नीटा को एसआईटी ने गिरफ्तार किया है।

पंजाब सरकार के काउंसिल ने इस पर जवाब के लिए समय मांगा, जिस पर हाईकोर्ट ने लंच के बाद सुनवाई का निर्णय लिया। लंच के बाद सुनवाई के दौरान पंजाब के डीजीपी की ओर से बताया गया की अभी तक नीटा को गिरफ्तार नहीं किया जा सका है।

इस बीच डीजीपी की ओर से दी गई जानकारी को गलत बताते हुए नीटा के पिता के वकील ने कहा कि पंजाब के मुख्यमंत्री के फेसबुक पर एक पोस्ट डालकर यह दावा किया गया था कि नीटा को गिरफ्तार किया गया है।
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आईजी क्राइम ने हलफनामा दायर करके दी जानकारी

आतंकियों को भगाने वाला गिरफ्तार - फोटो : self
सीएम के फेसबुक पेज को लेकर दी गई दलीलों के बाद हाईकोर्ट ने पंजाब सरकार को इस बारे में नए सिरे से हलफनामे के माध्यम से जानकारी देने के आदेश दिए हैं।

आईजी (क्राइम) जी. नागेश्वर राव ने हाईकोर्ट में हलफनामा दायर कर बताया की नाभा जेल ब्रेक मामले की जांच के लिए एसआईटी का गठन कर दिया गया है। इस पर हाईकोर्ट ने पूछा की जब एसआईटी का गठन किया जा चुका है, तो उनका कोई सदस्य हाईकोर्ट में जानकारी देने के लिए मौजूद क्यों नहीं है।

हाईकोर्ट को बताया गया की एसआईटी का कोई भी सदस्य आज चंडीगढ़ में नहीं है। कोर्ट ने कहा की जब तक इस मामले की केस डायरी नहीं देखी जाती तब तक आगे कोई भी निर्देश जारी नहीं किया जा सकता है।

 
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