पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट ने लिंगानुपात के गिरते स्तर पर चिंता जताते हुए कहा कि लोगों की बेटी के बारे में सोच बदलने की जरूरत है। कोर्ट ने कहा कि लोगों को बेटी की अहमियत का नहीं पता, बेटा भले ही पैसा होने तक परिजनों के साथ रहे परंतु बेटी आखिरी सांस तक अपने मां-बाप का साथ देती है।
इस पर हरियाणा ने कहा कि वे बड़े स्तर पर कदम उठा रहे हैं और हरियाणा में लिंगानुपात सुधरा है और यह 900:1000 पर आ गया है। हाईकोर्ट ने पूछा आंकड़े मौजूद हैं जिस पर हरियाणा ने समय मांगा। हरियाणा सरकार की अपील मंजूर करते हुए हाईकोर्ट ने समय देते हुए सुनवाई को टाल दिया।
याचिका दाखिल करते हुए हरियाणा में गिरते लिंगानुपात के लिए अवैध तरीकेसे करवाए जा रहे लिंग निर्धारण टेस्ट पर रोक लगाने की अपील की गई है। इसके साथ ही लिंग निर्धारण के लिए अन्य वैकल्पिक विधियों पर भी रोक लगाने की अपील की गई थी।
याचिकाकर्ता ने अपील की है कि पीएनडीटी एक्ट को सख्ती से लागू किया जाए ताकि गर्भ में शिशु की जांच न हो सके। अक्सर बड़ी संख्या में लिंग जांच के बाद बेटी होने की स्थिति में गर्भपात के मामले सामने आते हैं। इससे समाज में असंतुलन आ जाएगा।
इस मामले में हाईकोर्ट ने नोटिस जारी किया था जिसके जवाब में हरियाणा सरकार ने जवाब भी सौंपा। हरियाणा सरकार का जवाब फरवरी का होने के चलते हाईकोर्ट ने इसे नाकाफी माना। हालांकि इस जवाब को हाईकोर्ट ने रिकार्ड पर ले लिया परंतु हरियाणा सरकार से वर्तमान की स्थिति बताने को कहा।
हरियाणा सरकार ने कहा कि वे बड़े स्तर पर बेटी बचाओ अभियान चला रहे हैं और इससे लिंगानुपात में तेजी से सुधार हुआ है। हाईकोर्ट द्वारा आंकड़े मांगे जाने पर हरियाणा सरकार ने इसके लिए समय दिए जाने की अपील की। इस अपील को मंजूर करते हुए हाईकोर्ट ने सुनवाई को टाल दिया।