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हजारों कर्मचारियों को हाईकोर्ट का झटका, रेगुलराइजेशन पॉलिसियों पर रोक

Fri, 02 Sep 2016 08:53 PM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, चंडीगढ़
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supreme court
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हजारों कर्मचारियों को पंजाब हरियाणा हाईकोर्ट ने बड़ा झटका दिया है। साथ ही रेगुलराइजेशन पॉलिसियों पर रोक लगा दी है। पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट ने शुक्त्रस्वार को हरियाणा सरकार द्वारा कच्चे कर्मचारियों को नियमित किए जाने के लिए इस साल जून में लागू की गईं वर्ष 2014 की सभी रेगुलराइजेशन पॉलिसियों पर रोक लगा दी है।
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इस संबंध में दायर याचिका पर सुनवाई करते हुए जस्टिस सूर्यकांत व जस्टिस सुदीप आहलूवालिया की डिविजन बेंच ने हरियाणा सरकार द्वारा इस साल जून माह से रेगुलराइजेशन पालिसियों के तहत पक्के किए गए कर्मचारियों पर भी अंतिम फैसला इसी याचिका के अधीन लाते हुए मामले की सुनवाई 24 अक्तूबर तय कर दी। डिविजन बेंच ने साफ कर दिया कि जो कच्चे कर्मचारी अब तक इन रेगुलराइजेशन पॉलिसियों के तहत रेगुलर किए गए हैं, उनका नियमितीकरण भी इस केस के अंतिम फैसले पर ही निर्भर करेगा।

उल्लेखनीय है कि वर्ष 2014 में हरियाणा में विधानसभा चुनाव से ठीक पहले 16 जून और 7 जुलाई को नोटिफिकेशन जारी कर तत्कालीन कांग्रेस सरकार ने कॉन्ट्रैक्ट, एड-हॉक और अस्थायी तौर पर तीन वर्षों से अधिक समय से कार्यरत ग्रुप बी, सी और डी कर्मचारियों को नियमित किए जाने की नीतियां बना दी। तब सरकार की मंशा पर सवाल उठाते हुए इस नीति को हाईकोर्ट में चुनौती दी गई। इस याचिका पर कोई फैसला आता, उससे पहले हरियाणा की मौजूदा सरकार ने सत्ता संभालते ही नियमित किए जाने की नीतियों पर रोक लगा दी।
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लेकिन इस साल जून में अचानक ही सरकार ने इन नीतियों पर लगाई रोक हटाते हुए कच्चे कर्मचारियों को पक्का करने का काम शुरु कर दिया। इस पर, पूर्व याचिकाकर्ता योगेश त्यागी व अन्य ने हाईकोर्ट में अपील दाखिल कर अपनी याचिका पर जल्द सुनवाई करने का आग्रह किया। शुक्त्रस्वार को उनकी याचिका पर सुनवाई करते हुए हाईकोर्ट की डिविजन बेंच ने सरकार के फैसले पर रोक लगा दी।
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साल 2014 में ये मामला पहुंचा था हाईकोर्ट

कोर्ट - फोटो : अमर उजाला
योगेश त्यागी व अन्य द्वारा दायर याचिका में कहा गया है कि हरियाणा सरकार ने 16 जून व 7 जुलाई को इन कर्मचारियों को नियमित करने के लिए जो नीति बनाई है वह पूरी तरह से गैर-कानूनी और सुप्रीम कोर्ट द्वारा वर्ष 2006 में उमा देवी के केस में पांच जजों की खंडपीठ द्वारा दिए गए फैसले के भी खिलाफ है।

सुप्रीम कोर्ट अपने आदेशों में कह चूका है की बिना तय प्रक्त्रिस्या के नियुक्त किये गए कॉन्ट्रैक्ट, एड-हॉक एवं अस्थायी कर्मियों को नियमित नहीं किया जा सकता है। अगर ऐसा किया जाता है तो यह उन योग्य उम्मीदवारों के साथ अन्याय होगा जो तय प्रक्त्रिस्या के तहत अपनी नियुक्ति की प्रतीक्षा कर रहे हैं। लिहाजा सुप्रीम कोर्ट ने सभी राज्य सरकारों को निर्देश दिए थे की वह नियमित नियुक्तियां करे अन्यथा राज्य सरकारें गैर-कानूनी तरीके से कॉन्ट्रैक्ट, एड-हॉक एवं अस्थायी कर्मियों की नियुक्तियां कर ही काम चलाती रहेंगी।

सुप्रीम कोर्ट के फैसले के अनुसार , सिर्फ एक बार ही कर्मचारियों को यह फायदा दिया जा सकता है और हरियाणा सरकार वर्ष 2011 में कई कर्मचारियों को पहले ही नियमित कर चुकी है। लेकिन हरियाणा सरकार ने ठीक विधानसभा चुनाव से पहले कर्मचारियों को नियमित करने का गलत फैसला लिया है जो सुप्रीम कोर्ट के आदेशों की अवमानना भी है।
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