हजारों कर्मचारियों को पंजाब हरियाणा हाईकोर्ट ने बड़ा झटका दिया है। साथ ही रेगुलराइजेशन पॉलिसियों पर रोक लगा दी है। पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट ने शुक्त्रस्वार को हरियाणा सरकार द्वारा कच्चे कर्मचारियों को नियमित किए जाने के लिए इस साल जून में लागू की गईं वर्ष 2014 की सभी रेगुलराइजेशन पॉलिसियों पर रोक लगा दी है।
इस संबंध में दायर याचिका पर सुनवाई करते हुए जस्टिस सूर्यकांत व जस्टिस सुदीप आहलूवालिया की डिविजन बेंच ने हरियाणा सरकार द्वारा इस साल जून माह से रेगुलराइजेशन पालिसियों के तहत पक्के किए गए कर्मचारियों पर भी अंतिम फैसला इसी याचिका के अधीन लाते हुए मामले की सुनवाई 24 अक्तूबर तय कर दी। डिविजन बेंच ने साफ कर दिया कि जो कच्चे कर्मचारी अब तक इन रेगुलराइजेशन पॉलिसियों के तहत रेगुलर किए गए हैं, उनका नियमितीकरण भी इस केस के अंतिम फैसले पर ही निर्भर करेगा।
उल्लेखनीय है कि वर्ष 2014 में हरियाणा में विधानसभा चुनाव से ठीक पहले 16 जून और 7 जुलाई को नोटिफिकेशन जारी कर तत्कालीन कांग्रेस सरकार ने कॉन्ट्रैक्ट, एड-हॉक और अस्थायी तौर पर तीन वर्षों से अधिक समय से कार्यरत ग्रुप बी, सी और डी कर्मचारियों को नियमित किए जाने की नीतियां बना दी। तब सरकार की मंशा पर सवाल उठाते हुए इस नीति को हाईकोर्ट में चुनौती दी गई। इस याचिका पर कोई फैसला आता, उससे पहले हरियाणा की मौजूदा सरकार ने सत्ता संभालते ही नियमित किए जाने की नीतियों पर रोक लगा दी।
लेकिन इस साल जून में अचानक ही सरकार ने इन नीतियों पर लगाई रोक हटाते हुए कच्चे कर्मचारियों को पक्का करने का काम शुरु कर दिया। इस पर, पूर्व याचिकाकर्ता योगेश त्यागी व अन्य ने हाईकोर्ट में अपील दाखिल कर अपनी याचिका पर जल्द सुनवाई करने का आग्रह किया। शुक्त्रस्वार को उनकी याचिका पर सुनवाई करते हुए हाईकोर्ट की डिविजन बेंच ने सरकार के फैसले पर रोक लगा दी।