अमृतसर में 20 सितंबर 2016 को स्कूल बस के महावा के पास बनी डिफेंस नहर में गिरने से हुई 7 मासूमों की मौत मामले में पंजाब सरकार को जमकर फटकार लगाई। कोर्ट को पीडब्ल्यूडी व पंजाब मंडी बोर्ड ने बताया था कि 1700 करोड़ के प्रोजेक्ट भेजे गए हैं लेकिन अभी तक क्लीयर नहीं हुए हैं। हाईकोर्ट ने इस पर पंजाब सरकार को फटकार लगाते हुए जवाब तलब किया है।
डीएवी पब्लिक स्कूल, अटारी, अमृतसर की बस 20 सितंबर को स्कूल अवधि समाप्त होने के बाद बच्चों को घर छोड़ने के लिए निकली थी। महावा के नजदीक बने डिफेंस ड्रेन पर बने पुल के पास आते ही बस ने नियंत्रण खो दिया और यह बस ड्रेन में जा गिरी। जिस समय यह हादसा हुआ उस दौरान बस में करीब 50 छात्र मौजूद थे। बस में अधिकतर बच्चे पंजाब में सीमावर्ती क्षेत्र के थे और जैसे ही यह हादसा हुआ इसकी सूचना पुलिस को दी गई।
जल्दी ही बचाव अभियान आरंभ किया गया और पुलिस व स्थानीय लोगों ने मिलकर कुछ बच्चों की जान बचाई। हालांकि इस बहाव के चलते 7 मासूमों ने अपनी जिंदगी खो दी थी। हादसे में दर्जन भर बच्चे घायल भी हो गए थे जिन्हें अमृतसर में प्राइवेट अस्पताल में भर्ती कराया गया। इस मामले में हाईकोर्ट को एक पत्र लिखा गया था जिसमें समाचार पत्रों की कटिंग लगाई गई थी। इस पत्र को चीफ जस्टिस ने जनहित याचिका के तौर पर सुनने का निर्णय लेते हुए सुनने का निर्णय लिया था।
हाईकोर्ट ने पूछा था कि स्कूल बसों में बच्चों की सुरक्षा को लेकर क्या इंतजाम है। इस तरह के हादसों की स्थिति में जिम्मेदारी किसकी बनती है। इसके साथ ही बसों के औचक निरीक्षण के लिए क्या इंतजाम किए गए हैं। पत्र में बताया गया था कि टूटी सड़क के कारण हादसा हुआ था। इस पर पीडब्ल्यूडी ने कहा था कि यह सड़क पंजाब मंडी बोर्ड के आधीन आती है।
पंजाब मंडी बोर्ड और पीडब्ल्यूडी ने फिर बताया कि उन्होंने सड़कों के निर्माण से जुड़े प्रस्ताव पंजाब सरकार को भेजे हैं और कुल 1700 करोड़ के प्रोजेक्ट लंबित हैं जिनकी अभी तक मंजूरी नहीं मिली है। अब हाईकोर्ट ने इन प्रोजेक्ट के बारे में सरकार से जवाब तलब कर लिया है।