पंजाब सरकार की ओर से 22 जून को पास पंजाब आबकारी (संशोधन) बिल, 2017 को रद्द करने की एक मांग वाली याचिका पर बुधवार को पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट ने पंजाब सरकार को नोटिस जारी कर जवाब तलब किया है। हाईकोर्ट ने नोटिस जारी कर पूछा है कि क्यों न पंजाब आबकारी (संशोधन) बिल पर रोक लगा दी जाए। हाईकोर्ट ने यह आदेश चंडीगढ़ के एक गैर सरकारी संगठन अराइव सेफ सोसाइटी की ओर से दायर याचिका पर सुनवाई करते हुए जारी किए।
याचिका में संगठन ने कोर्ट को बताया कि पंजाब आबकारी (संशोधन) बिल सरकार ने केवल शराब माफिया को लाभ देने के लिए पास किया है। यह बिल सीधे तौर पर सुप्रीम कोर्ट की ओर से दिसंबर माह में जारी आदेश की अवेहलना हैं। पंजाब सरकार जानबूझ कर सुप्रीम कोर्ट के आदेश की गलत मतलब निकालकर हाइवे पर शराब परोसने पर आमादा हैं। इस बिल के संशोधन से राज्य में हाइवे पर होटलों, रेस्टोरेंट और क्लबों में शराब परोसने पर लगी रोक हट गई है। याचिकाकर्ता ने इस बिल को रद्द करने की मांग करते हुए कोर्ट से आग्रह किया कि जब तक मामला कोर्ट में विचाराधीन है, इस बिल के लागू होने पर रोक लगाई जाए।
याचिका में बताया गया कि पंजाब आबकारी (संशोधन) बिल, 2017 के रूप में राज्य सरकार ने पंजाब एक्साइज एक्ट, 1914 में संशोधन करके पंजाब में स्टेट हाईवे और नेशनल हाईवे से 500 मीटर के दायरे में शराब की बिक्री पर लगे प्रतिबंध में फेरबदल किया है। सरकार का मानना है कि इस मामले में सुप्रीम कोर्ट का फैसला ड्रंकन ड्राइविंग की रोकथाम से संबंधित है, लेकिन राज्य में स्टेट और नेशनल हाईवे के किनारे भारी संख्या में होटल, रेस्टोरेंट, क्लब व अन्य नोटिफाई स्थान हैं, जहां शराब बेचने व पीने की आज्ञा है। कानून की धारा 26 में संशोधन की वजह से अब हाईवे पर स्थित होटल, रेस्टोरेंट और क्लब में शराब बिक्री को लेकर लगा प्रतिबंध खत्म हो जाएगा।