बच्चा मां की कस्टडी में है और पिता से कोई वित्तीय सहायता नहीं मिलती तो ऐसे में मां ही मुआवजे की सही हकदार है, ताकि दूसरे बच्चे का पोषण कर सके। 11 वर्षीय बच्चे की हादसे में हुई मौत के मामले में पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट ने मोटर एक्सीडेंट क्लेम ट्रिब्यूनल के खिलाफ दाखिल मृतक की मां की याचिका को मंजूर करते हुए ट्रिब्यूनल के फैसले को खारिज कर दिया है। मामला यमुनानगर के छछरौली का है।
3 अगस्त 2011 को अनुज (11) स्कूल की तरफ जा रहा था। अचानक सामने से अनियंत्रित ट्रैक्टर ट्राली ने उसे टक्कर मार दी, इस हादसे में वह घायल हो गया। अनुज के पीछे आ रहे रिश्तेदार ने हादसा होते हुए देखा और जख्मी हालत में उसे अस्पताल ले गए।
इस बीच अनुज की मौत हो गई। इसके बाद अनुज की मां और पिता ने मोटर एक्सीडेंट क्लेम ट्रिब्यूनल के सामने मुआवजे के लिए दावा पेश किया। ट्रिब्यूनल ने 2.25 लाख मुआवजा राशि निर्धारित करते हुए माता-पिता में बराबर बांटने के आदेश दिए। इन आदेशों को चुनौती देते हुए मां कमलेश ने हाईकोर्ट में याचिका दाखिल कर दी।