पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट ने एयरफोर्स स्टेशन और चंडीगढ़ इंटरनेशनल एयरपोर्ट की 100 मीटर की परिधि में बने निर्माणों को चार माह में न गिराने पर हैरानी जताई है। हाईकोर्ट ने कहा कि लगता है कि कोई पारलौकिक शक्ति ही उन्हें बचा रही है। कोर्ट ने कहा कि कोई भी देश की सुरक्षा और देशहित की नहीं सोचता। हर कोई कोई अपने हितों के लिए कानून तोड़ने को तैयार है और फिर भी कोर्ट से राहत की उम्मीद रखते हैं।
हाईकोर्ट ने अगस्त माह में चार माह के भीतर ऐसे निर्माण गिराने के आदेश दिए थे। लेकिन निर्माण अब भी मौजूद हैं। इससे नाराज हाईकोर्ट ने कहा कि ऐसा इसलिए हो रहा है कि पंजाब सरकार निर्माण गिराने की मंशा नहीं रखती है। सरकार कार्रवाई करना ही नहीं चाहती है और ऊपर से अब स्थानीय निवासी सुप्रीम कोर्ट पहुंच गए हैं। फिलहाल वहां से भी राहत नहीं मिली और सुप्रीम कोर्ट ने मामले को वापस हाईकोर्ट भेज दिया है।
चीफ जस्टिस रवि शंकर झा ने कहा कि वह कैसे अपने ही दिए आदेशों को वापस ले लें। वे आदेश वापस नहीं ले सकते हैं। याचिकाकर्ताओं और पंजाब सरकार की ओर से दी गई दलीलों और विभिन्न हाईकोर्ट के फैसलों की जानकारी दिए जाने के बाद हाईकोर्ट ने कहा कि अब सुप्रीम कोर्ट में 6 मार्च को इस पर सुनवाई होनी है। ऐसे में अब सुप्रीम कोर्ट ही इस पर निर्णय कर सकता है।