पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट ने हरियाणा में राष्ट्रीय कृषि योजना के तहत रेक्सिल-2 डीएस कीटनाशक की खरीद फरोख्त मामले में कैग की जांच के निर्देश जारी करने के आग्रह को रद कर दिया है।
याचिकाकर्ता एनजीओ भिवानी सुधार और विकास समिति के अध्यक्ष पवन कुमार आंचल ने हाईकोर्ट में अरजी दाखिल कर जांच के निर्देश जारी करने का आग्रह किया था।
अरजी में कहा गया कि इस कीटनाशक की खरीद फरोख्त में करोड़ों रुपये का नुकसान सरकारी राजस्व को हुआ है। हाईकोर्ट ने मामले की आगामी सुनवाई 20 दिसंबर के लिए निर्धारित की है।
इस मामले में याची एनजीओ ने हाईकोर्ट में जनहित याचिका दाखिल की है। याचिका में कहा गया है कि फसलों की बीमारी को ठीक करने के लिए जर्मन कंपनी से कई करोड़ की रेक्सिल-2डीएस कीटनाशक खरीदी गई।
हरियाणा सीड डेवलेपमेंट कारपोरेशन के तत्कालीन एमडी अशोक खेमका आरोप लगा चुके हैं कि जर्मन कंपनी द्वारा तैयार दवा फसलों की बीमारी ठीक करने में नाकाम रही, जिसे बाद में बाद सरकार ने 100 फीसदी सब्सिडी के तहत किसानों को दे दिया।
उन्होंने अपने आरोपों में कहा है कि उक्त कंपनी से 60 करोड़ रुपये में यह कीटनाशक खरीदी गई। याचिका में कहा गया कि करनाल बंट बीमारी को ठीक करने के लिए गैर कानूनी तरीके से खरीदी गई इस दवा से इनसेक्टिसाइड एक्ट, 1968 का उल्लंघन हुआ है।
याचिका में कहा गया है कि इस फंगी साइड को मार्केट रेट से अधिक मूल्यों पर खरीदा गया। याची का कहना है कि 6 अक्तूबर 2010 को मुख्यमंत्री की चेयरमैनशिप में हुई बैठक में बिना कोई वैज्ञानिक आधार के रेक्सिल-2डीएस को खरीदने का फैसला लिया गया।
उन्होंने हाईकोर्ट से इस मामले में सीबीआई जांच के निर्देश जारी करने का आग्रह किया था। हाईकोर्ट ने इस मामले में हरियाणा सरकार को नोटिस जारी कर जवाब तलब किया था।
इस मामले में याची ने राष्ट्रीय कृषि योजना पर ही सवाल उठाकर खरीद फरोख्त की कैग जांच का आग्रह हाईकोर्ट से किया था।