Punjab And Haryana Highcourt Chandigarh
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पति के दहेज मांगने की बात पुलिस या पंचायत को न बताना पत्नी का असामान्य आचरण नहीं है। भारत में आमतौर पर लड़की और उसके परिजन ससुराल पक्ष के साथ समझौते का सर्वोत्तम प्रयास करते हैं और सार्वजनिक रूप से रिश्तों की खटास को उजागर करने से बचते हैं, इसका मतलब यह नहीं कि घर में सब ठीक है। पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट ने हत्या के मामले में सेना के कैप्टन की उम्रकैद की सजा के खिलाफ अपील को खारिज करते हुए यह टिप्पणी की है।
भारतीय सेना के पूर्व अधिकारी मूलरूप से उत्तर प्रदेश के कानपुर के रहने वाले संदीप ने हाईकोर्ट को बताया कि 2013 में दहेज के लिए पत्नी को प्रताड़ित करने और उसकी हत्या करने के मामले में उसे उम्रकैद की सजा सुनाई गई थी। 21 जुलाई, 2014 को फाजिल्का की अदालत के आदेश को रद्द करने के लिए हाईकोर्ट में अपील की गई थी।
एफआईआर के अनुसार याची ने पत्नी की कीटनाशक पदार्थ खिलाकर हत्या कर दी। 9 जुलाई 2013 को पुलिस को सूचना मिली थी कि अबोहर छावनी में सेना के एक अधिकारी की पत्नी ने फांसी लगाकर आत्महत्या कर ली है। पुलिस ने शिकायत के आधार पर मामला दर्ज कर लिया था।
शादी में दिए थे 10 लाख रुपये
शिकायतकर्ता के अनुसार 12 फरवरी 2013 को उसने अपनी बेटी श्वेता और संदीप की शादी की थी और इसके लिए काफी पैसा खर्च किया। शादी के समय 10 लाख रुपये का ड्राफ्ट दिया था। इस सबके बावजूद संदीप व उसका परिवार दहेज के लिए हमेशा श्वेता को प्रताड़ित करता था। पुलिस जांच में पता चला कि पत्नी को उसकी शक्ल सूरत के लिए संदीप ताना मारता था। इसके चलते श्वेता ने अपने शरीर में परिवर्तन के लिए सर्जरी भी करवाई थी।
हाईकोर्ट में दाखिल अपील में संदीप ने कहा कि रिकॉर्ड में ऐसा कुछ भी नहीं है कि उसने मृतका को दहेज के लिए प्रताड़ित किया था, क्योंकि उसने व उसके परिवार ने कभी कोई शिकायत नहीं की थी। सभी पक्षों को सुनने और रिकॉर्ड की जांच करने के बाद हाईकोर्ट ने याची के बयान में विरोधाभास पाया।
याची ने पहले पत्नी के पंखे से लटक कर मरने और बाद में जहरीले पदार्थ का सेवन करने के बाद बेहोश होने की बात कही। अदालत ने कहा कि आरोप साबित करने का दायित्व अभियोजन पक्ष पर होता है, लेकिन अपराध से संबंधित कुछ ऐसे तथ्य हो सकते हैं, जो केवल आरोपी ही जानता है और इसे साबित करना अभियोजन पक्ष के लिए संभव है।