पंजाब के मुक्तसर में दुष्कर्म की शिकार नाबालिग मनोरोगी पीड़िता को गर्भपात की अनुमति देने से हाईकोर्ट ने इनकार कर दिया है। अब पीड़िता को बच्चे को जन्म देना होगा। हालांकि हाईकोर्ट ने पंजाब सरकार को डिलीवरी का खर्च और मेडिकल बिल आदि का भुगतान करने के आदेश दिए हैं। साथ ही बच्चे को अडॉप्ट करवाने की व्यवस्था करने के भी आदेश दिए हैं।
याचिका दाखिल करते हुए पीड़िता ने बताया था कि उसके साथ दुष्कर्म किया गया था। इसके चलते मुक्तसर में जुलाई माह में एफआईआर भी दर्ज करवाई गई थी। जब याची को गर्भ का पता चला तो उसने निचली अदालत में गर्भपात की मंजूरी देने केलिए आवेदन किया। उसके आवेदन को निचली अदालत ने अस्वीकार कर दिया।
याची ने दलील दी कि यदि डिलीवरी हुई तो उसकी जान जाने का खतरा बहुत अधिक है। उसके खून में एचबी का स्तर 4.2 है जो बहुत ही कम है। हाईकोर्ट ने याचिका पर सुनवाई करते हुए तुरंत याची को पीजीआई में भर्ती कर उसकी जांच के आदेश दिए थे। पीजीआई के एक्सपर्ट बोर्ड ने पीड़िता के गर्भपात को असुरक्षित करार दिया और बच्चा पैदा करने की सिफारिश की है।
मामला शुक्रवार को सुनवाई के लिए पहुंचा तो हाईकोर्ट ने पीजीआई की रिपोर्ट को आधार बनाते हुए गर्भपात की अनुमति से इनकार कर दिया। हाईकोर्ट ने डिलीवरी तक का सारा खर्च पीड़ित पक्ष को पंजाब सरकार द्वारा एक माह में भुगतान करने के आदेश दिए हैं। इसके साथ ही पीड़िता के रहने के लिए व्यवस्था करने के भी आदेश दिए हैं।
बच्चे से डीएनए सैंपल लेने के भी आदेश दिए हैं जिसे ट्रायल के दौरान सबूत के तौर पर इस्तेमाल किया जा सके।