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अदालत और धार्मिक संस्थान बंद, फिर भी प्रशासन ने खोल दिया पूरा शहर, हाईकोर्ट में उठे सवाल

Sat, 16 May 2020 09:54 AM IST
खुशबू गोयल अमर उजाला, चंडीगढ़

सार

  • आदेश, गृह मंत्रालय के साथ बैठक कर 24 घंटे के भीतर फैसला लें
  • फैसले से अदालत सहित अन्य संस्थानों पर भी बढ़ा दबाव
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पंजाब हरियाणा हाईकोर्ट
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विस्तार
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चंडीगढ़ में लगे कर्फ्यू को हटाने के खिलाफ दाखिल याचिका पर सुनवाई के दौरान यूटी प्रशासन पर सवालों की झड़ी लग गई। पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट ने कहा कि प्रशासन सुपरपावर की तरह व्यवहार कर रहा है और यही कारण है कि सुखना लेक, रोज गार्डन आदि स्थानों पर सैकड़ों लोगों की भीड़ लग रही है।
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कोर्ट ने कहा कि अदालत में केवल अति आवश्यक मामलों पर सुनवाई चल रही है और प्रशासन ने शहर की मार्केट खोल दी है। वहीं, ट्रैफिक पर कोई नियंत्रण नहीं है। इसी बीच, याचिकाकर्ता ने हाईकोर्ट को बताया कि शहर के बाजार तो खुले हैं, लेकिन धार्मिक संस्थानों पर ताला लगा हुआ है।

हाईकोर्ट ने इस पर कड़ा रुख अपनाते हुए जब जवाब मांगा तो यूटी प्रशासन की ओर से बताया गया कि जो भी निर्णय लिए गए हैं, वह केंद्रीय गृह मंत्रालय की ओर से जारी दिशा-निर्देशों के अनुरूप हैं। इस पर हाईकोर्ट ने यूटी प्रशासन को गृह मंत्रालय के साथ बैठक कर 24 घंटे के भीतर इस मामले में निर्णय लेने के आदेश दिए हैं।
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गाइडलाइंस पर विवाद है कि उसे सही तरीके से लागू किया है या नहीं

शुक्रवार को सुनवाई आरंभ होते ही चंडीगढ़ प्रशासन की ओर से सीनियर स्टैंडिंग काउंसिल पंकज जैन ने हाईकोर्ट को बताया कि शहर के सीमित इलाके (बापू धाम, सेक्टर-38 , सेक्टर-52 और शास्त्री नगर) में ज्यादा मामले आए थे, जिनके कंटेनमेंट जोन बनाया गया है। बाकी शहर में पाबंदियों को कम रखा गया है। जहां तक बाजारों की बात है तो सभी दुकानें नहीं खोली गई हैं, सिर्फ नेबरहुड शॉप्स ही खोली गई हैं, जहां जरूरी सामान मिलता है।

पंचकूला और मोहाली से आने वाले ट्रैफिक को कैसे रोका जा सकता है। चंडीगढ़ दोनों की राजधानी भी है और दोनों राज्यों के ऑफिस चंडीगढ़ में हैं और 30 प्रतिशत कर्मचारियों को ऑफिस आने की इजाजत है। इसके साथ ही शहर में आने वाले लोगों की स्क्रीनिंग की जा रही है। केवल गृह मंत्रालय की ओर से जारी दिशा-निर्देशों के तहत जिनको छूट दी गई है, उन्हीं लोगों को शहर में प्रवेश की अनुमति दी गई है।

केंद्र सरकार की ओर से एडिशनल सॉलिसिटर जनरल ऑफ इंडिया सत्यपाल जैन ने कहा कि गाइडलाइंस पर विवाद है कि उसे सही तरीके से लागू किया है या नहीं। यह तो तय है कि सब सरकारें मिलकर कोरोना को हराने में लगी हैं। यह केंद्र की गाइडलाइंस है तो इस पर केंद्रीय गृह मंत्रालय से प्रशासन बैठक कर सकता है और मंत्रालय ही स्थिति स्पष्ट कर सकता है कि गाइडलाइंस का उल्लंघन हुआ है या नहीं। हाईकोर्ट ने जैन की इसी दलील के बाद प्रशासन को केंद्र के साथ बैठक करने के आदेश देते हुए याचिका का निपटारा कर दिया है।
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कर्फ्यू में ढील के खिलाफ दायर की गई थी जनहित याचिका

एडवोकेट पंकज चांदगोठिया ने जनहित याचिका दायर कर बताया था कि जब केंद्र सरकार ने शहर को रेड जोन में रखा है तो क्यों यहां इतनी ढील दी जा रही है? प्रशासन ने शहर में सुबह 7 बजे से शाम 7 बजे तक बाजारों को खोलने का फैसला कर लिया। वाहनों की आवाजाही पर कोई रोक नहीं लगाई गई है।

इंटर-स्टेट ट्रैफिक पर भी कोई नियंत्रण नहीं किया जा रहा। मोहाली और पंचकूला से आने वाले वाहनों को बिना पास के ही शहर में प्रवेश की इजाजत दे दी गई है। नतीजा यह हुआ है कि सड़कों पर वाहनों की भरमार हो गई है। यह सब केंद्रीय गृह मंत्रालय द्वारा 2 मई को जारी गाइडलाइंस का उल्लंघन है। कंटेनमेंट जोन भी गाइडलाइंस के अनुसार तय नहीं की गई है।
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