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हाईकोर्ट ने रच दिया इतिहास, पहली बार हिंदी में उपलब्ध कराया आदेश

Sun, 01 Jul 2018 11:19 AM IST
विवेक शर्मा, अमर उजाला, चंडीगढ़
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हिंदी में कोर्ट के फैसला चाहने वालों के लिए अच्छी खबर है। अब उन्हें अंग्रेजी भाषा में लिखे फैसले पर निर्भर नहीं रहना पड़ेगा। पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट के जस्टिस एमएमएस बेदी और जस्टिस हरिपाल वर्मा ने पहली बार हिंदी में फैसले की प्रति मुहैया कराकर इसका रास्ता साफ  कर दिया है। एडवोकेट मनीष वशिष्ठ की मांग पर दोनों जजों की खंडपीठ ने उनको अपना फैसला हिंदी में मुहैया कराया है। अंग्रेजी में उनके 67 पेज के आदेश का हिंदी अनुवाद 114 पेज  हाथ से लिखित रूप में उपलब्ध करवाया।   

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हाईकोर्ट और सुप्रीम कोर्ट में लगभग सभी काम अंग्रेजी में होते हैं। बहस भी अंग्रेजी में की जाती है और फैसले भी अंग्रेजी भाषा में ही सुनाए और लिखे जाते हैं। नारनौल बार एसोसिएशन के पूर्व प्रधान एवं एडवोकेट नवीन वशिष्ठ ने हाईकोर्ट से अपने खिलाफ जारी आदेश को हिंदी में देने की मांग की थी।

जस्टिस एमएमएस बेदी एवं जस्टिस हरिपाल वर्मा की खंडपीठ ने 31 मई को आपराधिक अवमानना मामले में नवीन को 67 पेज का फैसला अंग्रेजी में उपलब्ध करवाया था। वशिष्ठ ने खडपीठ से निर्णय के हिंदी अनुवाद की मांग करते हुए कहा था कि भले ही वह अधिवक्ता हैं लेकिन उसकी शिक्षा दीक्षा हिंदी में हुई है। हिंदी उसकी मातृभाषा है। 

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कोर्ट में रहा चर्चा का विषय

इसके अतिरिक्त भारतीय दंड संहिता की धारा 363(2) के प्रावधान के अनुसार वह फैसले का हिंदी अनुवाद लेने का अधिकारी है। वशिष्ठ की इस अपील पर हाईकोर्ट ने उनको निर्णय का हस्तलिखित हिंदी अनुवाद उपलब्ध करवा दिया। 

हाईकोर्ट में हिंदी में आदेश की मांग कई दिनों तक जजों के बीच चर्चा का विषय रही। आखिरकार आदेश हिंदी भाषा में उपलब्ध करवाने का निर्णय ले लिया गया। अब समस्या हिंदी में टाईप को लेकर थी। ऐसे में कोर्ट ने आदेश उपलब्ध करवाने के लिए कागज पर इसे लिखकर सौंपने का निर्णय लिया।
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