हाईकोर्ट ने कहा कि घर से भागने वाले प्रेमी जोड़े के पास संसाधनों का अभाव होता है। विवाह को प्रमाणित करने के लिए फोटो अनिवार्य नहीं होता और न ही सुरक्षा देने के लिए इसकी आवश्यकता होती है। जब इस प्रकार के दस्तावेज की आवश्यकता ही नहीं होती है तो इसे अनिवार्य करने का कोई औचित्य नहीं बनता है।
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कोर्ट ने रजिस्ट्री को आदेश दिया है कि सुरक्षा से जुड़ी याचिका के साथ विवाह की तस्वीरों को न रखा जाए। विवाह की तस्वीरें उसी स्थिति में रखी जाएं, जब एडवोकेट यह हलफनामा दे कि इस केस के लिए फोटो देना बहुत जरूरी है। कोर्ट ने कहा कि घर से भागे प्रेमी जोड़े के विवाह की जो फोटो दिखाई जाती हैं, उनमें से कई में ग्रंथी या पंडित आदि कोई नजर नहीं आता।
प्रेमी जोड़े मास्क में फोटो खिंचवाते हैं, जिनका कोई औचित्य नहीं है। ज्यादातर मामलों में यह फोटो किसी स्टूडियो में खींची नजर आती हैं, जिसका सुरक्षा से जुड़ी याचिका से कोई संबंध नहीं है।
घर से भाग कर शादी करने के बाद हाईकोर्ट में अपनी सुरक्षा को लेकर प्रेमी जोड़ों द्वारा दायर याचिकाओं की बढ़ती संख्या पर कोर्ट ने कहा कि अब सुरक्षा की मांग को लेकर प्रेमी जोड़ों द्वारा हाईकोर्ट में याचिकाएं दायर करना छोटा उद्योग बनता जा रहा है ऐसे मामलों में हाईकोर्ट को अपना समय लगाना पड़ता है, जिसमें सुरक्षा दिया जाना संविधान के अनुच्छेद-21 के तहत तय ही है।
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क्यों न यह काम निचली अदालतों में ही कर लिया जाए, जिससे हाईकोर्ट का समय बच सके। याचिकाओं में हाईकोर्ट को कुछ करने की जरूरत नहीं होती। ऐसे में बेहतर हो ऐसी याचिकाओं पर निचली अदालतें सुनवाई करें। कोर्ट ने कहा कि यह कोई आदेश नहीं हैं, लेकिन विधायिका को इस पर गौर करना चाहिए।