मेन होल में उतरने से हुई मौतों को लेकर एक समाचार पत्र के आर्टिकल के आधार पर पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट से संज्ञान लेकर सुनवाई आरंभ की है। मंगलवार को सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट ने कहा कि जब मशीनों का दौर है तो क्यों नहीं उनका सफाई के लिए इस्तेमाल होता। चंद पैसे देकर उन्हें मौत के मुंह में उतार दिया जाता है। सुनवाई आरंभ करते हुए हाईकोर्ट ने कहा कि आज भी हम सोसायटी में गंदगी को देखकर दूर भागते हैं।
उसी समाज में एक वर्ग को गंदगी की सफाई के लिए ऐसे स्थान पर उतार दिया जाता है, जहां मौत की संभावना बेहद ज्यादा होती है। कोर्ट ने सुझाव दिया कि इन लोगों का जीवन बचाने के लिए तीन माह के भीतर सारे प्रोसेस को मशीनी कर दिया जाना चाहिए। इसके साथ ही यदि तब तक किसी को मेन होल में उतारा जाता है तो वहां डाक्टर की मौजूदगी होनी चाहिए ताकि किसी इमरजेंसी की स्थिति से निपटा जा सके।
मेनहोल में उतरने वालों का बीमा होना चाहिए
इसके साथ ही हाईकोर्ट को बताया गया कि कई मामलों में मेनहोल में उतरे लोग ठेकेदार के माध्यम से आए होते हैं। सरकारी कर्मी की मौत पर तो राहत के बहुत से प्रावधान हैं, लेकिन ठेकेदार के माध्यम से आए मजदूरों को चंद पैसों के लिए जान दांव पर लगानी पड़ती है। हाईकोर्ट ने कहा कि मेनहोल में उतरने वाले लोगों का बीमा होना चाहिए। साथ ही उनकी मौत की स्थिति में पेंशन या अन्य प्रकार के लाभ की भी व्यवस्था की जानी चाहिए।