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पत्नी को खाना बनाना नहीं आना और मायके से अधिक लगाव तलाक का आधार नहीं: हाईकोर्ट

Tue, 03 Sep 2019 11:31 AM IST
खुशबू गोयल विवेक शर्मा, अमर उजाला, चंडीगढ़
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फाइल फोटो
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हाईकोर्ट ने एक बेहद रोचक मामले में अहम आदेश सुनाते हुए यह स्पष्ट कर दिया कि पत्नी को खाना बनाना न आना और मायके से अधिक लगाव तलाक का आधार नहीं हो सकते। हाईकोर्ट ने कहा कि यह वैवाहिक जीवन के आम विवाद हैं, जिसे पति के प्रति पत्नी की क्रूरता नहीं माना जा सकता।
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चंडीगढ़ निवासी एक व्यक्ति ने हाईकोर्ट में याचिका दाखिल करते हुए अपनी पत्नी को क्रूर बताते हुए तलाक दिए जाने की अपील की थी। याची ने बताया कि इससे पहले निचली अदालत में उन्होंने याचिका दाखिल करते हुए तलाक दिए जाने की अपील की थी। इस अपील को निचली अदालत ने खारिज कर दिया। जिसके खिलाफ हाईकोर्ट में याचिका दाखिल की गई है।

याची ने बताया कि 2004 में उसका विवाह यूपी के सुल्तानपुर से हुआ था। इसके बाद से ही उसकी पत्नी उसके व उसके परिवार के प्रति क्रूर रही है। उसकी पत्नी को खाना तक नहीं बनाना आता, जिसके चलते याची व उसके परिवार को परेशानी होती है। उसकी पत्नी का अपने मायके वालों से अधिक जुड़ाव है, जिसके कारण उनके अलावा किसी अन्य का घर आना तक उसे पसंद नहीं है।
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कई बार उसने पुलिस की महिला सेल में शिकायत दी और बाद में समझौता कर लिया, बावजूद इसके पत्नी के व्यवहार में सुधार नहीं आया। साथ ही याची ने पत्नी पर अवैध संबंध होने का भी आरोप लगाया। इसके जवाब में पत्नी की ओर से आरोपों को नकारा गया। पत्नी ने कहा कि पति कम दहेज के कारण नाराज था। इसके कारण ही वह 2009 में घर छोड़कर गई थी।

इस दौरान उसकी एक बेटी भी हुई, बावजूद इसके उसका पति उसे देखने तक नहीं आया। हाईकोर्ट ने इस पर पति की याचिका को खारिज करते हुए कहा कि जो आरोप लगाए जा रहे हैं वो तलाक का आधार नहीं हैं क्योंकि लगभग हर पति पत्नी के बीच इस तरह की समस्याएं होती हैं लेकिन इस आधार पर तलाक मांगना उचित नहीं है।

साथ ही कोर्ट ने कहा कि पत्नी पर अवैध संबंध होने का आरोप लगाना वो भी बिना किसी ठोस सबूत के यह उसपर अत्याचार और क्रूरता है। हाईकोर्ट ने कहा कि कई शिकायतें देने के बावजूद समझौता करना पत्नी की शादी बचाने की कोशिश को दर्शाता है। ऐसे में हाईकोर्ट ने याचिका खारिज करते हुए तलाक मंजूर करने से इनकार कर दिया।
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