सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद डीम्ड यूनिवर्सिटी से 2001 से 2005 के बीच डिस्टेंस एजुकेशन से बीटेक करने वालों के एआईसीटीई द्वारा जारी परीक्षा परिणाम को हाईकोर्ट ने रद्द कर दिया है।
हाईकोर्ट ने एआईसीटीई को आदेश दिए हैं कि जिन प्रश्नों के उत्तर गलत थे उनके अंक केवल उन परीक्षार्थियों को दिए जाएं, जिन्होंने प्रश्न का जवाब दिया था। पंजाब स्टेट पावर कॉर्पोरेशन लिमिटेड (पीएसपीसीएल) के कर्मचारियों ने हाईकोर्ट में याचिका दाखिल कर कहा था कि एआईसीटीई ने परीक्षा का परिणाम जारी करते हुए नियम को बदल दिया।
पहले नियम के अनुसार दो बार परीक्षाएं आयोजित की जानी थीं और पहली परीक्षा में यदि पास नहीं हुए तो दूसरा मौका आखिरी होना था। इसके बाद नियम बदल दिया गया और कहा गया कि दोनों परीक्षाओं में से जिसमें भी विषय में अधिक अंक होंगे उसी के अंक को जोड़ा जाएगा।
लिखित और प्रैक्टिकल परीक्षा दोनों में 40 प्रतिशत न्यूनतम अंक अनिवार्य था। इस दौरान जब आंसर की जारी की गई तो कुछ प्रश्नों में विसंगतियां पाई गईं। जिसके चलते एआईसीटीसी ने सभी परीक्षार्थियों को इसके अंक देने का निर्णय लिया, चाहे उसने उस प्रश्न का उत्तर दिया हो या न दिया हो।
याची की आपत्ति के बाद हाईकोर्ट ने इस विषय में सुप्रीम कोर्ट के आदेश की समीक्षा और एआईसीटीसी द्वारा अपनाए गए रुख को गलत करार देते हुए याचिका को मंजूरी दे दी। हाईकोर्ट ने अब एआईसीटीसी को आदेश दिया है कि वह विसंगतियों वाले प्रश्नों का उत्तर देने वालों को ही इसके लिए अंक दें। जिसने प्रश्न का कोई जवाब ही नहीं दिया है उसको इसके लिए अंक न दिए जाएं।
हाईकोर्ट ने 2018 में हुई जून और दिसंबर की परीक्षाओं के परिणाम इस संशोधन के साथ जारी करने के आदेश दिए हैं। हाईकोर्ट के इस आदेश से देश के वे इंजीनियर प्रभावित होंगे, जिन्होंने 2001 से 5005 के बीच डिस्टेंस एजुकेशन के जरिए बीटेक की डिग्री हासिल की थी।