मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर सिंह
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पंजाब के मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर सिंह ने किसानों से कुर्की संबंधी धारा को खत्म करने के लिए राज्य के सहकारी विभाग को मिली हुई छूट को रद्द कर दिया है। कैप्टन ने कहा है कि कांग्रेस के चुनावी घोषणा पत्र में किए गए वायदे के बाद उससे पीछे हटने का प्रश्न ही पैदा नहीं होता। मुख्यमंत्री ने कहा कि अब मंत्रिमंडल की अगली बैठक में यह मामला ले जाने की तैयारी की जा रही है।
सरकारी प्रवक्ता के अनुसार, कैप्टन ने यह भी स्पष्ट किया कि उनकी सरकार कर्जा कुर्की खत्म, फसल की पूरी राशि के चुनावी वायदे से पीछे नहीं हटेगी।
मुख्यमंत्री ने यह भी स्पष्ट किया कि उनकी सरकार किसानों का कर्ज माफ करने और कुर्की प्रणाली को खत्म करने के लिए किए गए वायदे को पूरा करने के राह में कोई अड़चन पैदा नहीं होने देगी। कैप्टन ने घोषणा की कि अब जो हो जाए, लेकिन पंजाब सहकारी सभाएं एक्ट 1961 की धारा 67 ए अधीन कुर्की (नीलामी) की धारा खत्म होगी। उन्होंने कहा कि पंजाब के लिए कांग्रेस द्वारा किए गए चुनावी वायदे पूरे करने के लिए वह पूरी तरह दृढ़ हैं।
कैप्टन सिंह ने कहा कि प्रत्येक विभाग की यह ड्यूटी बनती है कि कर्ज के बोझ और कुर्की से डरे किसानों का साथ देने के लिए सरकार की कोशिशों में वह मदद के लिए आगे आएं क्योंकि यह कारण बहुत से किसानों को अपने जीवन का अंत कर लेने जैसा कदम उठाने के लिए मजबूर करते हैं। उन्होंने कहा कि हमारे जीवन निर्वाह के लिए बड़ी मेहनत करने वाले किसानों को हम उनके सहारे नहीं छोड़ सकते।
मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य में किसान कर्जों की राशि का पता लगाने के लिए उनकी सरकार ने कमीशन का गठन किया है और कर्ज माफी के लिए संभावनाएं तलाशी जा रही हैं। इस संबंध में कमीशन शीघ्र ही अपनी सिफारिशें देगा और उनकी सरकार इन सिफारिशों को प्राथमिकता के आधार पर लागू करेगी।