पंजाब लघु उद्योग एवं निर्यात निगम (पीएसआईईसी) में प्लॉट आवंटन के नाम पर हुए करोड़ों के घोटाले की परतें अब खुल जाएंगी। प्रदेश सरकार ने विजिलेंस के सीनियर अधिकारियों को हिदायत दी है कि हफ्तेभर में केस की जांच पूरी कर रिपोर्ट जल्द सौंपी जाए। इस निर्देश के बाद विजिलेंस की टीमें फील्ड सर्वे के काम में जुट गई हैं। शिकायतकर्ताओं के बयान लिए जा रहे हैं। साथ ही, सरकार को रोजाना केस अपडेट किया जा रहा है।
पीएसआईईसी में यह घोटाला पूरी साजिश के तहत हुआ है। इसमें प्रॉपर्टी कारोबारियों से लेकर प्रशासन के आला अधिकारी व कई मंत्री तक शामिल थे, जिन्होंने पूरे पंजाब में करोड़ों के इंडस्ट्रियल प्लॉट अपने चहेतों को औने-पौने पर बेचकर मोटा मुनाफा कमाया है। इससे सरकार को करोड़ों के राजस्व का नुकसान हुआ है। यह मामला 2018 से विजिलेंस के पास चल रहा था, लेकिन आरोपी रसूख वाले थे। वह जांच को आगे बढ़ने नहीं दे रहे थे। यहां तक मुख्यमंत्री के एक पत्र का तर्क देकर इस जांच को रुकवाया गया। यह भी बात सामने आ रही है कि पत्र फर्जी था। इस पत्र की भी जांच की जा रही है।
पूर्व मंत्री से पूछताछ हुई तो विजिलेंस अधिकारी को दी थी रिश्वत
विजिलेंस ब्यूरो ने जब इस मामले की जांच करते हुए पूर्व मंत्री सुंदर शाम अरोड़ा से पूछताछ शुरू की तो उन्होंने जांच से बचने के लिए विजिलेंस ब्यूरो के सीनियर अधिकारी को ही रिश्वत दे डाली थी। उन्हें पचास लाख रिश्वत देते हुए काबू किया गया था। पूर्व मंत्री अभी जेल में हैं। अब तक उन्हें जमानत नहीं मिल पाई है। इसके अलावा विजिलेंस उनके कई करीबियों की जांच क र रही है।