पंजाब सरकार ने अपने अधिकारियों और मुलाजिमों के लिए कोरोना वैक्सीन लगवाना अनिवार्य कर दिया है। हालांकि ऐसे अधिकारी और कर्मचारी जो किन्हीं अन्य रोगों से पीड़ित हैं और चिकित्सा अधिकारी द्वारा यदि उन्हें वैक्सीन नहीं लगवाने की हिदायत दी जाती है, उन्हें इससे छूट मिलेगी।
सरकार के प्रसोनल विभाग की ओर से राज्य के सभी विभाग प्रमुखों, जिला उपायुक्तों, मंडल आयुक्तों को जारी पत्र में कहा गया है कि देश भर में कोरोना तेजी से फैल रहा है और इसकी दूसरी लहर बहुत ज्यादा घातक है। इस महामारी को रोकने के लिए कोरोना का टीकाकरण ही एक विकल्प है। पत्र में आगे कहा गया है कि सरकारी अधिकारी और कर्मचारी सरकार के कामकाज को सुचारू ढंग से चलाने के लिए अपनी सेवाएं दे रहे हैं।
ऐसे में अगर सरकारी अधिकारी व कर्मचारी कोरोना से पीड़ित हो जाते हैं तो लोगों को जरूरी सेवाएं पहुंचाने में रुकावट पैदा हो सकती है। इसे ध्यान में रखते हुए सरकारी अधिकारियों और कर्मचारियों का टीकाकरण बहुत जरूरी है ताकि लोगों को बिना किसी रुकावट के जरूरी सेवाएं मुहैया कराई जाती रहें।
पंजाब सिविल सेवा नियम (वोल्यूम 1, पार्ट 1) के नियम 3.9 के उपबंध के अनुसार- प्रत्येक सरकारी कर्मचारी को किसी भी समय खुद को टीका लगवाना और दोबारा टीका लगवाना चाहिए, जब सरकार द्वारा आम या विशेष आदेशों द्वारा निर्देश दिए जाते हैं।
पत्र में कहा गया है कि उपरोक्त उपबंध के तहत, सरकार द्वारा यह फैसला लिया गया है कि पंजाब सरकार के अधीन आते अधिकारी और कर्मचारियों के लिए कोरोना का टीका अनिवार्य किया जाए। इसके साथ ही अधिकारियों और कर्मचारियों को यह हिदायत भी दी गई है कि टीकाकरण के समय वहां मौजूद डाक्टर की सलाह के आधार पर करवाया जाए। अगर किसी भी अधिकारी या कर्मचारी को मेडिकल कंडीशन के आधार पर डाक्टर टीकाकरण से मना करते हैं तो उस अधिकारी-कर्मचारी को टीकाकरण से छूट दी जाएगी।