पंजाब में खेल मैदानों की समस्या को दूर करने के लिए सरकार अब पब्लिक प्राइवेट पार्टनरशिप के आधार पर खेल मैदान डेवलप करेगी। खेलों को बढ़ावा देने की दिशा में यह कदम उठाने की तैयारी की गई है। इसके साथ ही पंजाब सरकार खेलों के लिए अपने बजट में 35 प्रतिशत तक की बढ़ोतरी करने जा रही है।
यह कवायद पंजाब को खेलों में उसका सम्मान वापिस लौटाने के लिए की जा रही है। केंद्र सरकार ने खेलो इंडिया की शुरुआत की, ताकि युवाओं को खेलों की तरफ आकर्षित कर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पदक तालिका को ऊपर लाया जा सके। पिछले साल हुए खेलों इंडिया मुकाबलों में पंजाब 59 पदक हासिल कर 9वें स्थान पर रहा था।
पंजाब के खेल एवं युवा मामलों के मंत्री राणा गुरमीत सिंह सोढ़ी ने कहा कि उनकी कोशिश पंजाब को पहले 5 स्थानों पर लेकर आने की है। पंजाब में खेल मैदानों की कमी महसूस की जा रही है। ‘अमर उजाला’ ने इस मुद्दे को गंभीरता से उठाया था।
राणा सोढ़ी से इस मामले को लेकर हुई बातचीत में उन्होंने बताया कि पंजाब सरकार पब्लिक प्राइवेट पार्टनरशिप के आधार पर खेल मैदान डेवलप करने की योजना बना रही है और इस योजना को अंतिम रूप दिया जा चुका है। इसके तहत खाली पड़ी जगहों को प्राइवेट कंपनियों को दिया जाएगा। जो वहां वर्ल्ड क्लास लेवल के खेल मैदान तैयार करेंगी।
प्राइवेट कंपनियां इससे रेवेन्यू जनरेट करेंगी। रेवेन्यू के लिए इन खेल मैदानों में स्पोर्ट्स शॉपिंग मॉल्स बनाए जाएंगे। इसके साथ ही अन्य खिलाड़ियों से चार्ज लिया जाएगा। जिसमें उन्हें खेलने के लिए सामान देने के साथ ही अन्य सुविधाएं भी उपलब्ध करवाई जाएंगी।
राणा सोढी ने बताया कि नेशनल और स्टेट लेवल सहित पंजाब स्पोर्ट्स डिपार्टमेंट की ओर से जिन खिलाड़ियों का चयन किया जाएगा, उन्हें इन खेल मैदानों में कोच उपलब्ध करवाने सहित अन्य सुविधाएं मुफ्त दी जाएंगी। खेल मंत्री ने बताया कि इन सभी सुवधिाओं को देने के लिए ही पंजाब सरकार आगामी वित्त वर्ष के लिए अपने खेल बजट में भी 35 प्रतिशत का इजाफा करने जा रही है। जिससे खेलों के लिए बजट 150 करोड़ रुपये पहुंच जाएगा।