पंजाब सरकार ने हाल ही में सर्व शिक्षा अभियान से जुड़े कच्चे अध्यापकों को पक्का करते हुए उनका वेतन बढ़ाने के फैसले के बाद शुरू हुए विरोध को लेकर अपना रुख कड़ा कर लिया है। फिलहाल कुछ अध्यापकों को निलंबित किया गया है लेकिन सीएमओ के अधिकारियों से मिली जानकारी के अनुसार, राज्य सरकार जल्दी ही उक्त अध्यापकों को पक्का करने और उनका मासिक वेतन 15000 रुपये करने संबंधी नोटिफिकेशन जारी करेगी और उसके बाद जो अध्यापक ड्यूटी पर नहीं लौटेंगे तो उनकी सेवा समाप्त कर नए अध्यापकों की भरती शुरू कर दी जाएगी।
शुक्रवार को इस संबंध में एक अधिकारी ने बताया कि पहले सरकार इन अध्यापकों को पक्का करते हुए इनका वेतन 10 हजार रुपये मासिक तय कर रही थी लेकिन अध्यापकों के विरोध के बाद टीचर यूनियन के नेताओं और सरकार के बीच हुई बातचीत में 15000 रुपये मासिक वेतन पर सहमति बन गई है। इसके बावजूद अध्यापकों का विरोध जारी है। उन्होंने बताया कि सरकार अब अध्यापकों के विरोध के आगे झुकने को तैयार नहीं है और धरने पर बैठे अध्यापकों की अब किसी मांग पर ध्यान नहीं दिया जाएगा।
अधिकारी ने बताया कि सरकार इस बात पर विचार कर रही है कि अगर विरोध कर रहे अध्यापकों ने ड्यूटी ज्वाइन नहीं की तो उन्हें सीधे तौर पर नौकरी से हटाकर नए अध्यापकों की नियुक्ति की जाएगी। अधिकारी ने कहा कि सरकार ने वित्तीय हालात को ध्यान में रखते हुए अध्यापकों के हक में फैसला लिया है और अध्यापकों के साथ सलाह मश्विरा करके ही पूरा मामला तय किया गया है। लेकिन मांग पूरी होने के बाद भी अध्यापक बिना वजह विरोध कर रहे हैं। दूसरी ओर, राज्य भर में अध्यापक अपने परिवार और बच्चों के साथ जगह-जगह सरकार के खिलाफ धरने दे रहे हैं।
उन्होंने साफ कर दिया है कि वे 15 हजार रुपये मासिक के वेतन पर ड्यूटी ज्वाइन नहीं करेंगे। इस बीच, अध्यापकों के विरोध प्रदर्शन को राज्य में अन्य कर्मचारी संगठनों का समर्थन मिलना शुरू हो गया है, जिसके चलते राज्य सरकार के लिए इतनी बड़ी संख्या में अध्यापकों को नौकरी से हटाना आसान नहीं होगा। इस संबंध अध्यापक यूनियन के एक नेता ने बताया कि उनका संघर्ष तब तक जारी रहेगा जब तक सरकार अपने फैसले को नहीं बदलेगी।