राहुल गांधी के दरबार में पहुंचा अशोक तंवर और हुड्डा का विवाद
पंजाब में कांग्रेस की ऐतिहासिक जीत के बाद हरियाणा में फूट झेल रही कांग्रेस को आक्सीजन मिल गई है। वहीं कुछ नई उम्मीदें भी बंध गई हैं। हरियाणा में विधानसभा चुनाव के बाद तीसरे नंबर पर आई कांग्रेस पंजाब चुनाव के नतीजों के बाद उम्मीदों से भर गई है, जिसके बाद भविष्य में हुड्डा गुट के मजबूत होने के आसार और बढ़ गए हैं।
पंजाब की बानगी दिखा आलाकमान के सामने अपने विरोधियों के बीच मजबूत पकड़ बनाने में पंजाब का फैक्टर पूर्व सीएम हुड्डा के काम आएगा। कैप्टन अमरिंदर के साथ हुड्डा की दोस्ती भी पुरानी है। यह बात अलग है कि इस बार एसवाईएल मुद्दा होने के कारण हुड्डा कैप्टन के चुनाव प्रचार में नहीं गए, लेकिन यह सब सियासी दांव पेच तक सीमित हैं। पंजाब में पहले कांग्रेस ने कैप्टन की उपेक्षा की थी।
बाद में कांग्रेस को कैप्टन अमरिंदर को आगे लाना पड़ा, जिसके बाद राहुल गांधी को न चाहते हुए भी पंजाब में कैप्टन को चेहरा घोषित करना पड़ा। कांग्रेस को कैप्टन के आगे आने का लाभ भी हुआ नतीजा सबके सामने है। लिहाजा, पंजाब के नतीजों के बाद यह संभावना बलवती हो गई है कि हरियाणा में भी कांग्रेस संगठन में बदलाव कर पूर्व सीएम हुड्डा के हाथ में नेतृत्व की कमान दे सकती है।
हालांकि, इसके लिए आलाकमान को अन्य स्थानीय नेताओं के साथ विवाद शांत करवाना पड़ेगा। बहरहाल, हुड्डा लाबी को हाईकमान के सामने मजबूती के साथ अपनी बात रखने का एक मौका हासिल हो गया है। हुड्डा खेमे के लोगों ने इसकी अंदरूनी तैयारी भी कर ली है, लेकिन हरियाणा में चुनाव अभी बहुत दूर हैं।