डेड जोन में इस तरह की वीडियो संभव नहीं
डीजीपी ने बताया कि इस इंटरव्यू की क्वालिटी बहुत अच्छी थी, जो स्टूडियो की तरह लगी है। बठिंडा जेल कम्युनिकेशन डेड जोन में आती है। यहां पर अति आधुनिक तकनीकों का प्रयोग किया गया है। यहां पर कॉल करना संभव नहीं है। इसके अलावा इंटरव्यू में जग्गू भगवानपुरिया का कोई जिक्र नहीं है जबकि कुछ समय उनमें टकराव चल रहा था। गोइंदवाल जेल के बारे में कुछ नहीं कहा गया है। इससे यह साफ है कि उक्त इंटरव्यू पुराना है। लॉरेंस के इंटरव्यू शुरू होने के 30 सेकेंड के बाद किसी दूसरी जेल का जिक्र होता है जिससे यह साफ होता है कि वह पंजाब में नहीं है।
पंजाब की जेलों से बचता रहा है लॉरेंस
लॉरेंस बिश्नोई ने खुद को पंजाब की जेल से बचाने के लिए लंबी जंग लड़ी थी। इतना ही नहीं वह इस मामले को लेकर सुप्रीम कोर्ट तक गया। हालांकि जैसे ही सिद्धू मूसेवाला की हत्या हुई तो पंजाब पुलिस की टीम कानूनी लड़ाई के बाद उसे पंजाब लेकर आई है। आरोपी का नौ साल से अधिक समय पंजाब की बाहरी जेलों में गुजारा है। भले ही उसने यहां पर वारदातों को अंजाम दिया हो।
अभी चिट्ठी नहीं देखी, देंगे जवाब: डीजीपी
जब पत्रकारों ने डीजीपी से सवाल किया कि इंटरव्यू वाली घटना से पंजाब पुलिस पर सवाल उठ रहे हैं, पंजाब पुलिस की छवि तक खराब हो रही है। क्या इस मामले की उचित जांच के लिए एनआईए या किसी एजेंसी की मदद लेंगे। इस पर उनका जवाब था कि पंजाब पुलिस खुद इस मामले की जांच में सक्षम है। जेल विभाग जांच कर रहा है। वहीं, उनसे पूछा गया कि क्या मुख्य सचिव ने इस मामले में जांच का कोई आदेश दिया है, साथ ही आपसे रिपोर्ट मांगी है। इस पर डीजीपी का जवाब था कि वह जी-20 के चलते अमृतसर में थे। उन्होंने चिट्ठी नहीं देखी है, चिट्ठी देखकर वह जवाब देंगे।