पंजाब कांग्रेस ने गायक हंसराज हंस द्वारा विधानसभा चुनावों से पहले कांग्रेस छोड़कर भाजपा में चले जाने को अवसरवादी कदम करार देते हुए इस घटना को महत्वहीन करार दिया है। शनिवार को जारी बयान में, पार्टी नेताओं- डॉ. राजकुमार वेरका, गेजा राम वाल्मीकि व एडवोकेट रजनीश सहोता ने कहा है कि गायक ने हिंदुत्व की गाड़ी में सवार होने के लिए वाल्मीकि समुदाय व उसके मुद्दों को त्याग दिया प्रतीत होता है। उन्होंने कहा कि यह साफ तौर पर साबित हो रहा है कि हंस का यह कदम किन्हीं सिद्धांतों के आधार पर नहीं, बल्कि व्यक्तिगत फायदों की अवसरवादी सोच का परिणाम है।
पार्टी नेताओं ने कहा है कि हंस के कांग्रेस छोड़ने के फैसले पर कोई क्या बता सकता है, जिस पार्टी ने उन पर बहुत सारा प्यार व आदर बरसाया, और वह भी उस पार्टी में जाने को जिसे अपनी जनविरोधी नीतियों के लिए जाना जाता है। उन्होंने खुलासा किया है कि हंस के अकाली दल से आने के बावजूद, पंजाब कांग्रेस अध्यक्ष कैप्टन अमरिंदर सिंह ने आगे बढ़कर उनके नाम की राज्यसभा के लिए सिफारिश की थी, जो कदम हंस को कांग्रेस में मिली इज्जत को बयान करता है।
हालांकि, उन्होंने स्पष्ट किया है कि इससे पंजाब में कांग्रेस पर कोई प्रभाव नहीं पड़ने वाला, क्योंकि उक्त गायक की पार्टी की चुनावी योजना में बहुत छोटी भूमिका थी। जबकि हंस पहले शिरोमणि अकाली दल को छोड़कर कांग्रेस में जाने और थोड़े वक्त के बाद अब भाजपा में जाकर अपनी सारी विश्वसनीयता खो चुके हैं।