मुख्यमंत्री ने सार्वजनिक संस्थानों और सरकारी संपत्तियों के वर्चुअल तौर पर समूचे विनिवेश के केंद्र सरकार के फैसले पर हैरानी जाहिर की। मुख्यमंत्री ने कहा कि समूचे बजट ने बड़े कॉरपोरेट घरानों को छोड़कर समाज के प्रत्येक वर्ग को निराश किया है, क्योंकि भाजपा के नेतृत्व वाली केंद्र सरकार ने दूसरे वर्गों के हितों को दरकिनार कर कॉरपोरेट को खुश किया है।
बजट में मुट्ठी भर कॉरपोरेट घरानों के हितों की रक्षा : कैप्टन
मुख्यमंत्री ने कहा कि बजट देश की 130 करोड़ से अधिक आबादी की जरूरतों और इच्छाओं की कीमत पर मुट्ठी भर कॉरपोरेट घरानों के हितों की रक्षा करने के उद्देश्य से बनाया गया है, जो बेरोजगारी की बढ़ती समस्या को हल करने में असफल है।
कैप्टन ने कृषि क्षेत्र में केवल दो प्रतिशत वृद्धि पर दुख जाहिर करते हुए कहा कि क्या वित्त मंत्री ने एमएसपी (न्यूनतम समर्थन मूल्य) की संवैधानिक गारंटी का जिक्र करना जरूरी नहीं समझा जोकि पिछले दो महीनों से अधिक समय से नई दिल्ली की सीमा पर ठंड और लाठियों से जूझ रहे किसानों की एक प्रमुख मांग है।
मुख्यमंत्री ने शिक्षा क्षेत्र में केंद्र द्वारा ध्यान न देने की भी निंदा करते हुए कहा कि इससे कोविड महामारी के दौरान प्रभावित हुए लाखों बच्चों को बड़ा धक्का लगा है। ऐसा लगता है कि सरकार को हमारी रक्षा के लिए सरहदों पर तैनात सैनिकों, फ्रंटलाइन स्वास्थ्य कर्मियों और अध्यापकों की कोई परवाह नहीं है।
संघीय ढांचे के विरोधी मानसिकता वाला बजट
मुख्यमंत्री ने बजट में पंजाब और दूसरे उत्तरी राज्यों के साथ सौतेला व्यवहार करने के लिए भी केंद्र की निंदा करते हुए कहा कि यह आम बजट विधानसभा चुनाव वाले राज्य पश्चिमी बंगाल और दक्षिणी भारत को ध्यान में रखकर तैयार हुआ है। इन क्षेत्रों में बुनियादी ढांचे के विकास के लिए बड़ा हिस्सा रखा गया है।
लघु और मध्यम अवधि के लिए केंद्र और राज्यों के बीच तय किए वित्तीय घाटों के लक्ष्यों में अंतर की तरफ इशारा करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि बजट केंद्र सरकार की हमारे सहित गैर-भाजपा शासित राज्यों को दरकिनार करने और संघीय ढांचे की विरोधी मानसिकता वाली कोशिशों को दर्शाता है।