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अवैध खनन पर भड़के कैप्टन ने अफसरों को लगाई फटकार, विजिलेंस जांच के आदेश

Fri, 09 Mar 2018 10:59 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, चंडीगढ़
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अमरिंदर सिंह - फोटो : SELF
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पंजाब में अवैध खनन को देखकर मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर सिंह भड़क गए और उन्होंने अफसरों को जमकर फटकार लगाई, जांच के आदेश भी दिए। 14 जिलों के डिप्टी कमिश्नरों और जिला पुलिस अधीक्षकों के साथ बैठक कर कैप्टन ने उन्हें अवैध खनन पर लगाम लगाने की नसीहत दी। मुख्यमंत्री ने डेराबस्सी में अवैध खनन माफिया और अधिकारियों की मिलीभगत के आरोपों की विजिलेंस जांच के आदेश जारी करने के साथ ही डेराबस्सी के एसडीएम, डीएसपी और एसएचओ को जांच पूरी होने तक संबंधित विभाग से अलग रखने के आदेश दिए।
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मुख्यमंत्री ने तत्काल प्रभाव से एसडीएम परमदीप सिंह को मुख्य सचिव कार्यालय में रिपोर्ट करने को कहा है। वहीं डीएसपी पीएस बल और एसएचओ पवन कुमार को पुलिस लाइन में शिफ्ट कर दिया गया है। मुख्यमंत्री ने सभी डीसी और एसपी को यह साफ कर दिया कि अवैध खनन के मामलों की जांच में किसी भी तरह का राजनीतिक हस्तक्षेप नहीं होगा। उन्होंने अधिकारियों से मामलों की जांच में वास्तविक बोलीदाता और खड्ड के मालिक को शामिल करने के आदेश भी दिए।

करीब दो घंटे चली इस बैठक में मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर सिंह ने सभी अधिकारियों से उनके जिलों में अवैध खनन की स्थिति का ब्योरा लिया और यह भी जाना कि किन जिलों में पुलिस ने अब तक इस संबंध में केस दर्ज किए हैं। मुख्यमंत्री ने जिला पुलिस प्रमुखों से कहा कि वे अपने क्षेत्रों में गुंडा टैक्स में लिप्त लोगों की पहचान कर उन्हें गिरफ्तार करें ताकि स्थानीय स्तर पर लोगों के बीच प्रशासन के प्रति विश्वास में कमी न आए। उन्होंने साफ किया कि अवैध खनन के लिए संबंधित इलाके के एसएसपी और एसएचओ जवाबदेह होंगे।
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मुख्यमंत्री ने खनन विभाग को बड़े खनन स्थलों की नीलामी की संभावना का पता लगाने के लिए कहा, जिन्हें व्यवहार्य माना गया है। कुछ अधिकारियों ने कई खदानों में रेत की कमी का मुद्दा भी उठाया, जिस पर खनन विभाग ने स्पष्ट किया कि बोलीदाताओं को इसके बारे में पता था और आमतौर पर केवल अवैध खनन में शामिल होने के लिए ऐसी बोली लगाई जाती है। मुख्यमंत्री ने विभाग को निर्देश दिया कि वह भविष्य में केवल यथार्थवादी बोलियां सुनिश्चित करे।

साइंटिफिक निगरानी का सुझाव
बैठक के दौरान अधिकारियों ने खनन प्रक्रिया को मजबूत करने के लिए कई सुझाव रखे। इनमें टिप्परों की जीपीएस ट्रैकिंग, खनन स्थलों का वैज्ञानिक सीमांकन, वाहनों की आवाजाही पर निगरानी के लिए सभी संवेदनशील चेक-प्वाइंट पर वाईफाई युक्त सीसीटीवी स्थापित करने की सलाह दी गई। भार स्लिप के दुरुपयोग का मुद्दा भी अधिकारियों द्वारा उठाया गया। इसके लिए सुझाव दिया गया कि ये स्लिप खदान से टिप्पर के चलने के समय के साथ चिह्नित किए जाएं। इससे यह सुनिश्चित होगा कि अवैध रूप से निकाले जाने वाले रेत के परिवहन के लिए ड्राइवरों द्वारा एक ही पर्ची का इस्तेमाल नहीं किया जा रहा।

प्रत्येक खनन स्थल पर नियुक्त होगा एक संरक्षक
प्रत्येक खनन स्थल पर एक संरक्षक नियुक्त करने की भी घोषणा की गई। कैप्टन ने कहा कि अराजकता बर्दाश्त नहीं होगी। अवैध खनन को खत्म करने के लिए मौजूदा नीति में सभी कमियों को दूर किया जाएगा। उन्होंने अधिकारियों से स्पष्ट किया कि किसी भी ढिलाई के लिए उन्हें उत्तरदायी ठहराया जाएगा।
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