पंजाब के मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर सिंह ने शुक्रवार को केंद्र सरकार के कृषि अध्यादेशों को अकालियों की हिस्सेदारी एनडीए की ‘किसान मारू, पंजाब मारू’ साजिश का हिस्सा करार दिया। इसके साथ ही मुख्यमंत्री ने कहा कि यह सब कुछ घटने के बावजूद अकाली अपने राज्य और लोगों की कीमत पर बेशर्मी के साथ गठबंधन का हिस्सेदार बने हुए हैं।
लुधियाना स्थित पंजाब कृषि विश्वविद्यालय के वर्चुअल किसान मेले की शुरुआत के मौके पर मुख्यमंत्री ने कहा कि मुझे नहीं पता कि भाजपा और अकालियों की पंजाब के साथ क्या दुश्मनी है और वह हमें तबाह करने पर क्यों तुले हैं? यह मेला ऑनलाइन संपर्क के साथ 100 स्थानों पर हुआ, जिनमें कैबिनेट मंत्रियों, विधायकों और पंजाब प्रदेश कांग्रेस कमेटी के प्रधान सुनील जाखड़ समेत किसानों, किसान नुमाइंदों और अन्य भाईवालों ने शिरकत की।
कैप्टन ने एक बार फिर चेतावनी दी कि यह कानून सरहदी राज्य के लोगों में गुस्सा की भावना पैदा करेंगे, जिससे पाकिस्तान को आग और भड़काने का मौका मिल जाएगा। कैप्टन ने कहा कि यह किसान विरोधी कदम पंजाब की आबोहवा को खराब करेगा। केंद्र सरकार को इस मुद्दे पर फिर विचार करना होगा। यह अध्यादेश मुल्क की अनाज सुरक्षा के लिए पंजाब और यहां के किसानों की तरफ से 65 सालों में से किए बलिदानों को मिट्टी में मिला देंगे।
कृषि अध्यादेशों में पंजाब की शमूलियत के बारे में भाजपा और अकाली दल के दावों को पूरी तरह रद्द करते हुए मुख्यमंत्री ने स्पष्ट किया कि कृषि सुधारों के बारे में केंद्र की तरफ से कायम की उच्चाधिकार कमेटी की मीटिंग, जिनमें उनकी सरकार शामिल थी, में कृषि संबंधी ऐसे किसी अध्यादेश या नए कानून के मुद्दे पर कोई विचार नहीं हुआ। केंद्रीय मंत्री राव साहिब पाटिल और शिरोमणि अकाली दल के प्रधान सुखबीर सिंह बादल के झूठे और भ्रामक दावों के संदर्भ में मुख्यमंत्री ने कहा कि राजनीतिज्ञों को ऐसे गंभीर मुद्दों पर झूठ नहीं बोलना चाहिए क्योंकि ऐसे मसले हमारी आने वाली पीढ़ियों के लिए गहरे मायने रखते हैं।