पंजाब के मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर सिंह और कैबिनेट मंत्री नवजोत सिंह सिद्धू के बीच छिड़ी जंग आखिरकार सिद्धू के कैबिनेट से बाहर होने के साथ समाप्त हो गई।
सिद्धू की ओर से बीते सोमवार को सीएम के चंडीगढ़ स्थित आवास पर भेजा गया इस्तीफा कैप्टन ने शनिवार सुबह मंजूर कर लिया और उसे वैधानिक मंजूरी के लिए राज्यपाल वीपी सिंह बदनौर के पास भेज दिया।
कुछ घंटों बाद राज्यपाल ने भी सिद्धू के एक पंक्ति के इस्तीफे पर मंजूरी की मुहर लगा दी। सरकारी प्रवक्ता के अनुसार, सिद्धू को अलॉट बिजली विभाग अब मुख्यमंत्री के पास रहेगा।
आखिरकार दो दिन की कशमकश के बाद सीएम ने सिद्धू का इस्तीफा मंजूर किया। हालांकि उन्होंने सिद्धू को मनाने के लिए संदीप संधू को जिम्मेदारी सौंपी थी, लेकिन वे इसमें सफल नहीं हो सके।
गौरतलब है कि नवजोत सिद्धू ने गत 14 जुलाई को कैबिनेट मंत्री के पद से इस्तीफा दे दिया था। सिद्धू ने ट्वीट करके इस्तीफे की जानकारी दी थी। ट्विटर पर पोस्ट किए गए इस्तीफे पर दस जून की तारीख है, जो ऑल इंडिया कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष को संबोधित किया गया है। इसमें लिखा है कि वह पंजाब कैबिनेट में मंत्री पद से इस्तीफा दे रहे हैं। उन्होंने पंजाब सीएम कैप्टन अमरिंदर सिंह को भी इस्तीफा भेजा।
मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर सिंह ने दिल्ली में मीडिया से बात करते हुए कहा था कि वह चंडीगढ़ जाकर सिद्धू के इस्तीफे को पढ़ेंगे और उसके बाद ही उस पर कोई फैसला लेंगे। लेकिन 17 जुलाई की शाम को मुख्यमंत्री दिल्ली से लौटे लेकिन सिद्धू के इस्तीफे पर कोई फैसला नहीं ले पाए। अगले दो दिन भी उन्होंने सोच विचार करने में निकाले। यही नहीं सिद्धू को मनाने की कोशिश भी करवाई, लेकिन वह नहीं माने।