कैबिनेट की ओर से 2010 की नीति के मौजूदा प्रावधान 4.3 (जी) को भी संशोधित करने का फैसला किया गया है, जिससे प्रायोजित करने वाली संस्था पट्टे पर ली गई जमीन, किसी सरकारी अथॉरिटी या ग्राम पंचायत से ली गई हो, पर निजी यूनिवर्सिटी स्थापित करने की पात्र बन जाएगी। बशर्ते कि यह पट्टा या लीज कम-से-कम 33 वर्षों तक के लंबे समय के लिए हो।
पंजाब प्राइवेट यूनिवर्सिटी पॉलिसी-2010 में ऐसा कोई प्रावधान नहीं था, जिसके अंतर्गत पट्टे पर जमीन लेकर यूनिवर्सिटी की स्थापना की जाए, जबकि भारत के काफी राज्यों में जमीन की जरूरत संबंधी ऐसा प्रावधान है। पंजाब प्राइवेट यूनिवर्सिटी पॉलिसी-2010, जिसका मकसद राज्य में उच्च शिक्षा के क्षेत्र में गुणवत्ता पूर्वक निजी शिक्षा को उत्साहित करना है, के अंतर्गत राज्य सरकार ने अभी तक 14 यूनिवर्सिटियों को मंजूरी दी है। इनके अलावा चार और निजी यूनिवर्सिटियां स्थापित करने संबंधी प्रस्ताव विचाराधीन हैं।
पंजाब कोऑपरेटिव ऑडिट (ग्रुप-बी) सर्विस रूल्ज में होगा संशोधन
कैबिनेट द्वारा ‘द पंजाब कोऑपरेटिव ऑडिट (ग्रुप-बी) सर्विस रूल्ज, 2016’ को संशोधित किए जाने की मंजूरी दे दी गई है और इसके अंतर्गत सीनियर सहायक (लेखा) के पद को सीनियर सहायकों में विलय किया जाएगा, जिससे सहकारिता विभाग के ऑडिट विंग में काम करते सीनियर सहायक (लेखा) की तरक्कियों का रास्ता साफ हो सके। यह नियम पंजाब गजट में अधिसूचना की तारीख से प्रभावी होंगे।
पंजाब के सभी ग्रामीण क्षेत्रों में पाइपलाइन के जरिए जल सप्लाई करने और घरों में नल कनेक्शन मुहैया करवाने की योजना का 2022 तक 100 फीसदी लक्ष्य हासिल करने के लिए सरकार ने 15वें वित्त आयोग की ग्रांट इस्तेमाल करने का फैसला किया है। इसके जरिए बाकी बचे 17.59 लाख घरों को प्रमुखता से घरेलू टोटी कनेक्शन (एफएचटीसी) मुहैया करवाने का फैसला किया गया है।
कैबिनेट के फैसले के अनुसार 17.59 लाख घर, जिनको अभी कनेक्शन दिए जाने हैं, में से 7.60 लाख घरों को एफएचटीसी के अंतर्गत 2020-21 के दौरान कवर किया जाएगा और 9.99 लाख घरों को 2021-22 में कवर किया जाएगा। मंत्रालय की तरफ से 15वें वित्त आयोग के अंतर्गत सैनिटेशन के लिए बंधी ग्रांटों के प्रयोग से राज्य के समूचे गांवों को अगले पांच सालों में खुले में शोच मुक्त (ओडीएफ) बनाने के लिए स्वच्छ भारत मिशन (ग्रामीण) फेज-2 को प्राथमिकता देने का फैसला किया गया है। पंजाब सरकार की तरफ से 15वें वित्त आयोग के अंतर्गत पहले ही सभी गांवों को ग्रांट बांटी जा चुकी हैं।
पीएसीएल के विनिवेश के लिए कैबिनेट सब कमेटी के गठन को मंजूरी
पंजाब मंत्रिमंडल ने गुरुवार को पंजाब राज्य औद्योगिक विकास निगम (पीएसआईडीसी) के जरिए राज्य सरकार द्वारा पंजाब अल्कलीज एंड केमिकल लिमिटेड (पीएसीएल) में रखी गई 33.49 प्रतिशत बराबर हिस्सेदारी के विनिवेश की प्रक्रिया को अंतिम रूप देने के लिए कैबिनेट सब कमेटी के गठन को मंजूरी दे दी। इसके साथ ही ‘विनिवेश बारे अफसरों के कोर ग्रुप’ के गठन को भी मंजूरी दे दी गई, जो इस विस्तृत प्रक्रिया को अधिकारिक सब-कमेटी के समक्ष रखेंगे। इस कमेटी में कैबिनेट मंत्री ब्रह्म मोहिंद्रा, मनप्रीत सिंह बादल और सुंदर शाम अरोड़ा शामिल हैं।
मुख्यमंत्री कार्यालय के प्रवक्ता के मुताबिक यह फैसला बीमार औद्योगिक यूनिट-पीएसीएल के विनिवेश के प्रस्ताव के संदर्भ में लिया गया, जो वित्त विभाग की ओर से विनिवेश और सार्वजनिक उद्यम निदेशालय द्वारा पेश किया गया था और जिससे पीएसआईडीसी के नकदी के बहाव में सुधार लाया जा सकेगा।
विनिवेश बारे मुख्य सचिव के नेतृत्व वाली अफसरों के कोर ग्रुप की कमेटी को इस संबंध में अंतिम फैसला लेने के लिए मंत्रिमंडल को अपनी सिफारिशें और रिपोर्ट सौंपने को कहा गया है। कमेटी के अन्य सदस्यों में प्रमुख सचिव वित्त, प्रमुख सचिव उद्योग, मैनेजिंग डायरेक्टर पीएसआईडीसी, मैनेजिंग डायरेक्टर पीएसीएल के अलावा डायरेक्टर विनिवेश और सार्वजनिक उद्यम इसके कनवीनर होंगे।
2018 में भी विनिवेश के लिए बना था अफसरों का कोर ग्रुप
मंत्रिमंडल के फैसले के पालन में तीन सरकारी सार्वजनिक संस्थानों- पंजाब कम्युनिकेशन लिमिटेड (पनकॉम), पंजाब वित्त निगम (पीएफसी) और पीएसआईडीसी के विनिवेश के लिए 13 अगस्त, 2018 को भी विनिवेश संबंधी अफसरों के कोर ग्रुप का गठन किया गया था और मुख्य सचिव को इसका चेयरमैन और प्रमुख सचिव वित्तीय, मुख्यमंत्री के प्रमुख सचिव, संबंधित विभाग के प्रशासकीय सचिव, संबंधित सार्वजनिक संस्थान के एमडी इसके सदस्य के अलावा डायरेक्टर पब्लिक इंटरप्राइजेज और डिसइंवेस्टमेंट इसके कनवीनर बनाए गए थे।