पंजाब के राज्यपाल बनवारी लाल पुरोहित।
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पंजाब के राज्यपाल के आदेश के अनुसार गत 15 नवंबर को 16वीं पंजाब विधानसभा के चौथे (बजट) सत्र का सत्रावसान कर दिया गया है। इस बजट सत्र को 20 अक्तूबर को समाप्त हुई बैठक के बाद विधानसभा स्पीकर की ओर से अनिश्चितकाल के लिए स्थगित कर दिया गया था। सरकारी प्रवक्ता ने बताया कि राज्यपाल द्वारा भारत के अनुच्छेद 174 की क्लॉज (2) की सब-क्लॉज (ए) के अनुसार सौंपी शक्तियों का प्रयोग करते हुए सत्र का सत्रावसान किया गया है।
विशेष बात यह है कि सत्रावसान के साथ ही पंजाब का यह पहला बजट सत्र बन गया है, जो साढ़े आठ महीने तक जारी रहा। गौरतलब है कि राज्य सरकार ने इस साल 3 से 24 मार्च तक विधानसभा का बजट सत्र बुलाया था, जिसे 24 मार्च को अनिश्चितकाल के लिए स्थगित किए जाने के बाद विस्तारित सत्र के रूप में 19 व 20 जून को बुलाया गया, जिसे राज्यपाल ने गैरकानूनी ठहराते हुए सत्र में पारित प्रस्तावों को अपने पास रोक लिया था।
इसके बाद सरकार ने 20 व 21 अक्तूबर को बजट सत्र के विस्तार के रूप में ही दो दिवसीय सत्र बुलाकर तीन वित्त विधेयक पेश करने चाहे, लेकिन राज्यपाल ने इस दो दिवसीय सत्र को भी गैरकानूनी बताते हुए वित्त विधेयक सदन में पेश करने की अनुमति नहीं दी।
ऐसे हालात में दो दिवसीय सत्र 20 अक्तूबर को ही अनिश्चितकाल के लिए स्थगित कर दिया गया और पंजाब सरकार राज्यपाल के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट चली गई। सुप्रीम कोर्ट द्वारा राज्यपाल के फैसलों को गलत ठहराने के बाद राज्य सरकार ने बजट सत्र के सत्रावसान के लिए राज्यपाल को पत्र लिखा, जिस पर बुधवार को राज्यपाल ने अपनी मुहर लगा दी।