पंजाब विधानसभा की गरिमा बुधवार को तार-तार हो गई। दो दिन से विधानसभा के अंदर ही धरने पर बैठे कांग्रेसी विधायकों ने कागज के गोले बनाकर जहां विधानसभा अध्यक्ष को निशाना बनाया, वहीं कांग्रेसी विधायक त्रिलोचन ने सत्ता पक्ष के नेताओं की ओर अपना जूता निकाल कर फेंक दिया। बाद में सत्ता पक्ष के विरोध जताने पर विधायक ने आरोप जड़ा की उन पर जातिसूचक अपशब्द कहे गए।
इस दौरान 22 बिल पारित किए गए, लेकिन इन बिलों के पारित होने के पूरे समय कांग्रेसी विधानसभा अध्यक्ष की ओर लगातार बिल की रिपोर्ट और अन्य कागज के गोले फेंकते रहे, जबकि सदन के सुरक्षाकर्मी उनसे अध्यक्ष को बचाने में जूझते रहे। सत्र को स्पीकर ने 15 मिनट के लिए स्थगित भी किया, लेकिन विस के अंदर ही सत्ता और विपक्ष में तनाव का माहौल पैदा हो गया है।
बचने के लिए गलत आरोप लगा रहे हैं विधायक त्रिलोचन
पंजाब विधानसभा सेशन
- फोटो : अमर उजाला
सत्ता पक्ष के दलित और निचली जाति के विधायकों ने सदन में जूता चलाने वाले विधायक त्रिलोचन पर आरोप लगाया कि वह बचने की खातिर जातिसूचक अपशब्दों के आरोप लगा रहे हैं।
अकाली विधायकों का कहना था कि उन्होंने आरोप विधायक विरसा सिंह वलटोहा पर लगाया, जबकि जूता उनसे काफी दूर बैठे सूचना मंत्री बिक्रम सिंह मजीठिया की ओर फेंका था। जूता फेंकने के बाद विधायक सकपका गया और बचाव में पीछे छिपने लगे।
15 मिनट के बाद अन्य कांग्रेसी विधायकों की सलाह पर अपशब्दों के उपयोग का आरोप लगाया। वलटोहा ने कहा कि यदि सदन की रिकार्डिंग में उनके मुंह से अपशब्द साबित हो जाएंगे तो वह हमेशा के लिए राजनीतिक छोड़ देंगे।
सदन शुरू होते ही करने लगे थे नारेबाजी
पंजाब विधानसभा सेशन
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बुधवार को सुबह सदन शुरू होते ही कांग्रेसी विधायक सदन में सरकार के खिलाफ नारेबाजी करने लगे। इस दौरान उन्होंने सरकार पर भ्रष्टाचार का आरोप लगाते हुए नारेबाजी शुरू कर दी। कांग्रेस विधायकों ने इस दौरान सीएम बादल को तानाशाह करार देते हुए उन्हें जनरल डायर तक कह डाला।
स्पीकर ने हालात को देखते हुए सदन की कार्रवाई 15 मिनट तक स्थगित करनी पड़ी। हंगामें को देखते हुए शून्यहाल, प्रश्नकाल और ध्यानाकर्षण प्रस्ताव सस्पेंड कर दिया गया। हालांकि हंगामे के बीच सदन की कार्यवाही जारी रही और 22 बिलों को पारित करने की औपचारिकता पूरी कर ली गई।