सरकारी भूमि पर अवैध कब्जे देश के नियोजित विकास में सबसे बड़े बाधक हैं। पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट ने यह टिप्पणी ऐसी एक याचिका को खारिज करते हुए की, जिसमें याचिकाकर्ता ने सरकारी जमीन पर कब्जे को सही ठहराने की मांग की थी।
याचिका दाखिल करते हुए जालंधर की माहेरू गांव के गुरमुख सिंह ने जालंधर के जिला पंचायत एवं विकास अधिकारी की ओर से 2017 के फैसले को खारिज करने की मांग की थी। साथ ही ग्रामीण विकास एवं पंचायत विभाग के निदेशक ने उनकी अपील को खारिज करने का जून 2021 में जो आदेश दिया था, उसे भी याची ने हाईकोर्ट में खारिज करने की अपील की। हाईकोर्ट में याची ने दलील दी कि यह भूमि उसने मई 1979 में खरीदी थी।
राजस्व विभाग ने इसे रिकॉर्ड में दर्ज नहीं किया, लेकिन इस भूमि पर उसका मालिकाना हक है। जालंधर के जिला पंचायत एवं विकास अधिकारी ने पंचायत और याची को सुनने के बाद याची को जमीन खाली करने का आदेश दिया था। इस आदेश को याची ने ग्रामीण विकास एवं पंचायत विभाग के निदेशक के समक्ष अपील कर चुनौती दी थी।
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जून 2021 को उनकी अपील खारिज कर दी गई। याची ने अब इन दोनों फैसलों को रद्द करने की तथा याची को मालिकाना हक देने की अपील की। हाईकोर्ट ने कहा कि याची के पास कोई साक्ष्य मौजूद नहीं है कि यह भूमि कभी उसने खरीदी थी। हाईकोर्ट ने अपील को खारिज करते हुए कहा कि इस प्रकार सरकारी जमीन पर कब्जे देश के नियोजित विकास में बड़े बाधक हैं।