आम आदमी पार्टी के पंजाब प्रभारी और दिल्ली के डिप्टी सीएम मनीष सिसोदिया, सुच्चा सिंह छोटेपुर की शर्तों पर मंथन करेंगे। सिसोदिया 25 को चंडीगढ़ में पंजाब के नेताओं के साथ इस मुद्दे पर बैठक करेंगे। जानकारी के मुताबिक सिसोदिया 25 को चंडीगढ़ में होने वाली उत्तरी राज्यों के वित्त मंत्रियों की बैठक में हिस्सा लेने यहां आ रहे हैं। उसी दिन पंजाब इकाई ने सीएम आवास के घेराव का एलान किया है। जिसके चलते पार्टी के सभी प्रमुख नेता उस दिन चंडीगढ़ में ही होंगे। सिर्फ सह प्रधान डॉ. बलबीर सिंह विदेश में होने के कारण नहीं होंगे।
बैठक के बाद सिसोदिया पंजाब इकाई के साथ बैठक करेंगे। जिसमें पूर्व सूबा कन्वीनर सुच्चा सिंह छोटेपुर की शर्तों पर विचार-विमर्श किया जाएगा। पिछले दिनों ही पंजाब के प्रमुख नेताओं ने राष्ट्रीय कन्वीनर अरविंद केजरीवाल के निर्देश पर छोटेपुर के घर जाकर उन्हें पार्टी में वापस आने को कहा था। छोटेपुर ने जवाब दिया था कि वह अब तक वह सब नहीं भूले हैं, जो उनके साथ किया गया था। गौरतलब है कि छोटेपुर को वालंटियर्स से पैसे लेने का आरोप लगा कर ऐन चुनाव से पहले पद से हटा दिया गया था। बाद में आरोपों का कोई सबूत भी नहीं दिया गया।
छोटेपुर ने कहा था कि पार्टी में वापसी के लिए उन्होंने कुछ शर्तें रखी हैं। अगर राष्ट्रीय नेतृत्व उन पर सहमत होता है तो बात आगे बढ़ेगी, वरना खत्म हो जाएगी। उस मीटिंग के बाद पूरी पार्टी इलेक्शन मोड में आ गई थी, सभी नेता अपने हलकों में जिला परिषद और ब्लॉक समिति उम्मीदवारों के प्रचार के लिए चले गए थे। चुनाव से निपटने के बाद अब पार्टी नए सिरे से छोटेपुर और सांसद डॉ. धर्मवीर गांधी को वापस लाने की कवायद शुरू करेगी।
सिसोदिया उन शर्तों पर पार्टी नेताओं से विचार-विमर्श करेंगे, फिर जल्द ही छोटेपुर की केजरीवाल के साथ बैठक होने की भी उम्मीद है। आप किसी भी कीमत पर छोटेपुर को वापस लाने की तैयारी में है और छोटेपुर के लिए भी आप में वापसी सियासी करियर के लिए ऑक्सीजन के समान होगी। इसलिए छोटेपुर का आप में जाना लगभग तय माना जा रहा है।
चुनाव ने दिलाई खैरा-फोबिया से निजात
जिला परिषद और ब्लॉक समिति चुनाव में आप का प्रदर्शन बेहद निराशाजनक रहा। पार्टी जिप की कोई सीट नहीं जीत सकी, सिर्फ बीस ब्लॉक समितियों पर ही सिमट गई। लेकिन यह चुनाव पार्टी के लिए फायदेमंद रहा। इसने पार्टी को खैरा-फोबिया से निजात दिला दी। सारे नेता और वॉलंटियर चुनाव में जुटे रहे, जिससे बागी सुखपाल खैरा का प्रभाव काफी कम हो गया। दूसरा फायदा यह हुआ कि चुनाव के दौरान निचले स्तर पर कई नए प्रभावशाली नेता सामने आए। जल्द ही इन सब की समीक्षा के लिए पार्टी बैठक करेगी।
बागियों की वापसी की नहीं हो रही बात
आप के बागी सुखपाल खैरा गुट को मिले रिस्पॉन्स के कारण ही पार्टी पर दबाव बना। उसके चलते ही पार्टी ने अपने पुराने नेताओं सुच्चा सिंह छोटेपुर और डॉ. धर्मवीर गांधी को वापस लाने का फैसला किया। लेकिन बागियों की वापसी पर पार्टी में कोई बात नहीं हो रही है। पार्टी सूत्रों के मुताबिक दूसरे विधायकों के साथ तो पार्टी नेता संपर्क में हैं। खैरा गुट के जय किशन रोड़ी ने पार्टी कार्यक्रमों में शामिल होना भी शुरू कर दिया है। लेकिन सुखपाल खैरा और कंवर संधू को पार्टी वापस लेने को तैयार नहीं है।