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स्मार्ट सिटी बनाने के लिए जनभागीदारी जरूरी - केके यादव

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चंडीगढ़। चंडीगढ़ स्मार्ट सिटी लिमिटेड शहरी क्षेत्र में इस प्रकार विकास करना चाहता है जिससे स्मार्ट सिटी में बिना बदलाव किए विरासत को संवारा जा सके। शहर को स्वच्छ व सुंदर बनाना स्मार्ट सिटी लिमिटेड का मुख्य लक्ष्य है। यहां के बुनियादी ढांचे को मजबूत बनाकर डिजिटल सेवाएं प्रदान करना भी मुख्य एजेंडा है। स्मार्ट सिटी बनाने के लिए जनभागीदारी जरूरी है।
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यह बातें वीरवार को होटल जेडब्ल्यू मैरिएट स्थित अर्बन ट्रांसफोर्मेशन समिट में स्मार्ट सिटी के सीईओ केके यादव ने कहीं। एलीट्स टेक्नोमीडिया प्राइवेट लिमिटेड, नगर निगम और चंडीगढ़ स्मार्ट सिटी की ओर से आयोजित एक दिवसीय समिट में शहर को आईटी के क्षेत्र में विकसित करने के लिए चर्चा की गई।
सीईओ ने कहा कि चंडीगढ़ शहरी परिवर्तन मॉडल का प्रतीक है। दुनियाभर के आर्केटेक्ट और अर्बन प्लानर्स ने इस बात को स्वीकार किया है। देश की स्वतंत्रता के बाद शिवालिक रेंज की तलहटी में योजनाबद्घ तरीके से बसने वाला शहर केवल चंडीगढ़ ही है। स्मार्ट सिटी के तहत फिलहाल चार प्रमुख योजनाएं हैं जिसमें जल प्रबंधन, वेस्ट मैनेजमेंट, विकास प्रौद्योगिकी-सक्षम निगरानी प्रणाली और ऊर्जा संरक्षण पर काम चल रहा है। इस मौके पर पंजाब, हरियाणा, हिमाचल प्रदेश, तेलंगाना से आए प्रतिनिधियों ने भी स्मार्ट सिटी की समस्याओं और चुनौतियों को लेकर जानकारी दी।
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दक्षिण कोरिया के राजदूत ने किया आगाह
कार्यक्रम में दक्षिण कोरिया के राजदूत शिन बोंगकिल ने आगाह करते हुए अपने यहां की समस्याओं के बारे में जिक्र किया। उन्होंने कहा कि भविष्य में ये समस्याएं पूरे विश्व में होने वाली हैं। जलवायु परिवर्तन और बढ़ते प्रदूषण से पूरा विश्व घिरने वाला है। इसलिए इस पर रोक लगाना जरूरी है। हमें आज ही समस्याओं को पहचानना होगा।
मुकेश आनंद ने लीकार्बुजिए के मॉडल पर उठाए सवाल
कार्यक्रम में एक सत्र में प्रशासन के चीफ इंजीनियर मुकेश आनंद ने भी अपनी बात रखी। उन्होंने कहा कि कैपिटल कॉम्पलैक्स की बिल्डिंग पूरी तरह से कांक्रीट की बनी है। इसके अलावा यह मात्र सात से आठ दशक पुरानी है। परंतु इसे यूनेस्को ने विश्व धरोहर का दर्जा दिया है। उन्होंने लीकार्बुजिए के मॉडल पर सवाल उठाते हुए कहा कि मुगलकालीन बिल्डिंग और ब्रिटिश कालीन बिल्डिंग को पूरी तरह से कवर्ड किया गया है जबकि लीकार्बुजिए ने कैपिटल कॉप्लैक्स को खुला ही छोड़ दिया है। बारिश के मौसम में इसमें अंदर तक पानी आ जाता है। सेक्टर एक से लेकर 23 तक बने सरकारी घर हेरीटेज हैं। छोटे घरों में लोगों को काफी समस्या होती हैं, लेकिन हेरीटेज होने के कारण उनमें कोई मरम्मत का कार्य नहीं कराया जा सकता।
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